5 मार्च 2020 - 14:28
पुतीन और अर्दोग़ान की गुरुवार की मुलाक़ात में गर्मजोशी नज़र आने की संभावना नहीं, झुकने पर कौन मजबूर होगा तुर्की या रूस?

वार्ता के चार दौर और तीन टेलीफ़ोनी वार्ताएं नाकाम हो जाने के बाद अब गुरुवार को तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान और रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन की मास्को में मुलाक़ात हो रही है जिसमें इदलिब शहर और आसपास के इलाक़ों में जारी लड़ाई के बारे में वार्ता होनी है।

इस समय तनाव बढ़ गया है और हालात पर नज़र रखने वालों का कहना है कि किसी भी समय रूस और तुर्की के बीच सीधी लड़ाई शुरू हो सकती है।

राष्ट्रपति पुतीन ने उस समय तक अर्दोग़ान से मुलाक़ात पर सहमति नहीं जताई जब तक कि रूस के एयर कवर की मदद से सीरियाई सेना ने सराक़िब शहर को आज़ाद नहीं करा लिया और इस शहर से अन्नुस्रा फ़्रंट तथा अन्य आतंकी संगठनों को खदेड़ नहीं दिया।

इस मुलाक़ात का एजेंडा क्या होगा यह पहले से ही मालूम है और यह भी पता है कि अर्दोग़ान की स्थिति कमज़ोर है। वार्ता की नाकामी की संभावना ज़्यादा है। वार्ता तभी सफल होगी जब तुर्क राष्ट्रपति रूसी शर्तों के सामने झुक जाएंगे।

इस तथ्य का पता उस बयान से भी चलता है जो बुधवार को क्रेमलिन हाउस तथा रूसी रक्षा मंत्रालय से जारी किया गया। इसमें कहा गया कि इदलिब में सीरियाई सेना की कार्यवाही पूरी तरह क़ानूनी है और सूची समझौते के तहत अंजाम दी जा रही है। बयान  में कहा गया है कि सीरिया में रूसी सेना तो दमिश्क़ सरकार की दावत पर गई है जबकि अन्य देशों की सेनाओं की वहां उपस्थिति ग़ैर क़ानूनी है। यह सीधा इशारा तुर्क सेना की तरफ़ है।

राष्ट्रपति अर्दोग़ान इदलिब और आसपास के इलाक़ों में इस्लामी ख़िलाफ़त की स्थापना करना चाहते हैं और इसके लिए वह सेफ़ ज़ोन आदि जैसे नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि इस इलाक़े में अन्नुस्रा तथा अन्य चरमपंथी संगठन हमेशा रहें। मगर उनकी इस इच्छा को रूस स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि यह सीरिया के साथ ही रूस की सुरक्षा के लिए भी ख़तरा है।

हमें उम्मीद नहीं है कि इस मुलाक़ात से कोई हल निकलेगा क्योंकि अब पुतीन को अर्दोग़ान पर विश्वास नहीं है। उनका मानना है कि अर्दोग़ान समझौतों का सम्मान नहीं करते बल्कि समझौता केवल समय हासिल करने के लिए करते हैं।

नैरब और आसपास के इलाक़ों में तुर्क सैनिकों पर रूस के हवाई हमले अर्दोग़ान के लिए साफ़ संकेत है कि सीरिया के लिए रूस का सपोर्ट पूरी मज़बूती से जारी है और जारी रहेगा।

हम नहीं समझते कि तुर्की के पास रूस से दो मोर्चों पर एक साथ लड़ने की ताक़त है। एक मोर्चा सीरिया का है और दूसरा मोर्चा लीबिया का है। ख़ास तौर पर अब जबकि नैटो ने तुर्की की मदद की फ़रियाद सुनकर अपने कान बंद कर लिए हैं।

तुर्की के राष्ट्रपति के पास पुतीन की शर्तों के सामने झुकने के अलावा कोई चारा नहीं है। उन्हें इदलिब और आसपास के इलाक़े सीरियाई सेना के हवाले करने होंगे। अगर वह अपनी ज़िद पर अड़े तो यह भी संभव है कि सीरिया और रूस मिलकर तुर्की के ख़िलाफ़ कुर्दों का कार्ड खेलें और इस बात की भी संभावना है कि सीरिया और लीबिया में तुर्की के सैनिकों पर रूस के हमले तेज़ हो जाएं।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के जाने माने टीकाकार