6 फ़रवरी 2020 - 19:23
दुनिया को डराने वाला, कोरोना वायरस, क्यों बच्चों के सामने लाचार है?

चीन के वूहान से फैलने वाला कोरोना वायरस अब भी दुनिया के लिए एक रहस्य बना हुआ है और हालिया दिनों में पता चला कि यह भयानक वायरस, बच्चों पर कम असर करता है लेकिन इसकी वजह क्या है? इसका पता नहीं चल पा रहा है।

चीन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 563 से आगे बढ़ चुकी है और सरकारी एलान के अनुसार 5 फरवरी तक कोरोना वायरस से प्रभावित होने के 3694 नये मामले सामने आए हैं जबकि इस वायरस से कुल प्रभावितों की संख्या 28018 हो चुकी है।

इस वायरस का से प्रभावित होने वाले पहले रोगी का पता दिसंबर में चला है लेकिन अभी तक 15 साल से कम बच्चों पर इसका असर बहुत कम देखा गया है। मेडिकल पत्रिका न्यू इंगलैंड ने लिखा है कि कोरोना का असर बच्चों पर नहीं होता और अगर होता भी है तो बहुत कमज़ोर होता है।

डाक्टरों ने बीजिंग में उदाहरण स्वरूप 9 महीने की एक बच्चे में कोरोना वायरस का असर देखा है इसी तरह जर्मनी में एक बच्चे में असर मिला लेकिन पहले उसकी मां में कोरोना वायरस का पता चला था, तीसरा मामला चीन के शेंज़ीन में नज़र आया था लेकिन वायरस के लक्षण या तो नज़र नहीं आए या फिर बेहद कमज़ोर थे।

येल स्कूल आफ मेडिसिन के प्रोफेसर रिचर्ड मार्टिन्लो कहते हैं कि हमने जो देखा है उससे पता चलता है कि अज्ञात कारणों से कोरोना वायरस बुनियादी रूप से व्यस्क लोगों पर असर करता है।

इसके साथ ही चीन में कोरोना वायरस से जिन लोगों की अब तक मौत हुई है उनमें एक भी बच्चा नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों पर असर न होने या कम होने की कुछ वजहें हो सकती हैं।

  1. बच्चों के बारे में किसी मामले के बारे में रिपोर्ट नहीं की गयी है मतलब हो सकता है कि बच्चों पर भी असर हुआ हो लेकिन उसकी सूचना न दी गयी हो और अभिभावकों को सर्दी जुक़ाम लगा होगा।
  2.  बच्चों पर इस लिए असर कम हुआ हो क्योंकि कोरोना वायरस सब से पहले वूहान में खाना बाज़ार में हुआ जहां गैर कानूनी तरीके से पशुओं को बेचा जाता था और प्रायः बच्चे वहां नहीं जाते।
  3. हो सकता है कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कुछ खास बात हो जिससे उन पर व्यस्कों जैसा असर नहीं हो पाता।

बहरहाल रिपोर्ट के अनुसार अभी यह सब अनुमान हैं और हो सकता है कि भविष्य में बच्चों के प्रभावित होने के मामले भी सामने आएं।