सूरए ताहा की आयत क्रमांक 115 का अनुवादः
और हमने इससे पहले आदम से वचन लिया था (कि वे शैतान के बहकावे में न आएंगे) किन्तु वे भूल गए और हमने उन्हें प्रतिज्ञा (की पूर्ति) में दृढ़ न पाया।
संक्षिप्त टिप्पणी:
उन्होंने ईश्वर की इस सिफ़ारिश को गंभीरता से नहीं लिया और अपनी इस प्रतिज्ञा का उस प्रकार से पालन नहीं किया जिस प्रकार से करना चाहिए था। परिणाम स्वरूप वे समस्याओं में ग्रस्त हुए और स्वर्ग से निकाल दिए गए।
इस आयत से मिलने वाले पाठ:
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ठोस इरादे व संकल्प का अभाव, ईश्वर की दृष्टि में निंदनीय है।
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ईश्वर ने मनुष्य से प्रतिज्ञा ली है कि वह अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करेगा किंतु मनुष्य इस पर कटिबद्ध नहीं रहता।