26 जनवरी 2020 - 13:43
आयत क्या कहती हैं? सही आस्था के बिना मनुष्य कोई भला कर्म कर ही नहीं सकता।

जो व्यक्ति प्रलय का इन्कार करता है क्या वह प्रलय में किसी भी प्रकार के पारितोषिक की मांग कर सकता है?

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 112 का अनुवादः

और जो कोई इस स्थिति में भले कर्म करे कि वह मोमिन हो तो उसे न तो किसी अत्याचार का भय होगा और न वह किसी प्रकार की कमी (या हक़ मारे जाने) से डरेगा।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

जो लोग इस संसार में अच्छे कर्म करें और बुरे कामों से बचते रहें तो ईश्वर और प्रलय पर ईमान रखने की स्थिति में उन्हें पूरा पूरा पारितोषिक मिलेगा और उसमें किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगा और उनका किसी भी प्रकार का अधिकार व्यर्थ नहीं जाएगा।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. जो भी अपनी क्षमता व संभावना के अनुसार भले कर्म करे, उसे ईश्वर की ओर से पारितोषिक प्राप्त होगा, चाहे उसके कर्म कम हों या अधिक।
  2. भले कर्मों की स्वीकृति की शर्त यह है कि वह कर्म ईमान के आधार पर ईश्वरीय भावना के अंतर्गत किए जाएं।