प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत की मोदी सरकार द्वारा लाए गए विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ पूरे भारत में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच इस देश की राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग़ के प्रदर्शन पर पूरी दुनिया की नज़र टिकी हुई है। इस बीच शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल से मिला। इस मुलाक़ात में प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि शाहीन बाग़ से गुज़रने वाली सभी स्कूली बसों को निकलने का रास्ता दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम पहले से ही स्कूल बस और एंबुलेंस को गुज़रने का रास्ता दे रहे थे। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने यह भी एलान किया है कि उनका प्रदर्शन पहले की ही तरह जारी है और उनकी मांगे पूरी होने तक यह प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा।
इस बीच राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत की मोदी सरकार जिस तरह सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध अड़ियल रवैया अपनाए हुए है उससे आने वाले दिनों में और ज़्यादा पूरे देश में प्रदर्शन देखने को मिलेंगे। जानकारों के अनुसार, मोदी सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी तरह की बात का न करना उनके तानाशाही व्यवहार को दर्शाता है। इस बीच एक ओर जहां भारत की सराकार इन प्रदर्शनकारियों की कोई सुध नहीं ले रही हैं वहीं इस देश की जनता पूरी एकता के साथ इन प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी दिखाई दे रही है।