14 जनवरी 2020 - 19:32
पुतीन व अर्दोग़ान से मिलने के बाद सीरिया के विदेश मंत्री की ईरान यात्रा और अब क़तर नरेश का पहला औपचारिक ईरान दौरा, क्या कुछ अहम

मशहूर अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने अपने एक लेख में क़तर नरेश की पहली औपचारिक तेहरान यात्रा के बारे में लिखा है कि इस दौरे का मतलब यही है कि शैख़ तमीम, ईरान के लिए कोई बहुत अहम संदेश लेकर आए थे।

वरिष्ठ टीकाकार कमाल ख़लफ़ ने रायुल यौम में छपने वाले अपने लेख में लिखा है कि कुछ लोगों का कहना है कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने क़तर नरेश से इस लिए मुलाक़ात की है क्योंकि वर्ष 2013 में क़तर का शासक बनने के बाद शैख़ तमीम आले सानी का यह ईरान का पहला औपचारिक दौरा है। अलबत्ता इसके अलावा भी कई समीक्षाएं हैं जिनसे पता चलता है कि चूंकि ईरान के इस्लामी क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी को जिस ड्रोन ने अपने मीज़ाइलों का निशाना बनाया वह क़तर में स्थित अमरीकी छावनी से उड़ा था, या यह कि वे मीज़ाइल ही क़तर से फ़ायर किए गए थे और क़तर नरेश इस बारे में स्पष्टीकारण के लिए तेहरान आए थे।

 

ऐसा लगता है कि इनमें से कोई भी बात वास्तविकता से क़रीब नहीं है क्योंकि वे रिपोर्टें अधिक स्पष्ट नहीं हैं जिनमें बताया गया है कि अमरीकी ड्रोन ने क़तर से उड़ान भरी थी और अगर इसे मान भी लिया जाए तब भी ईरान, इस वजह से क़तर को लक्ष्य नहीं बनाएगा। ऐसा लगता है शैख़ तमीम के इस दौरे की वजह इन दिनों ईरान व अमरीका के बीच तनाव मेें अभूतपूर्व बढ़ोतरी है और इस दौरे को मध्यस्थता की नज़र से भी देखा जा सकता है। ऐसा प्रतीत होता है कि शैख़ तमीम, ईरान के लिए कोई बहुत अहम संदेश लेकर आए थे जिसे वे सिर्फ़ ईरान के वरिष्ठ नेता को ही बताना और उनसे जवाब हासिल करना चाहते थे।

 

अब इस संभावित संदेश पर ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का जवाब क्या होगा? यह जानने के लिए समय गुज़रने और क्षेत्र के वर्तमान तनाव के स्तर के भविष्य को देखन की ज़रूरत है। विशेष कर इस लिए कि ईरान व उसके क्षेत्रीय घटकों ने क्षेत्र से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने का फ़ैसला कर लिया है और रणनैतिक शक्ति प्रदर्शन जल्द ही शुरू हो सकता है ख़ास करके अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार शुरू होने के समय।

 

इस बीच क़तर नरेश की तेहरान में उपस्थिति के दौरान ही सीरियाई शिष्टमंडल का भी तेहरान पहुंचना ध्यान योग्य था। हालांकि सीरियाई सूत्रों का कहना है कि यह दौरा पूर्व निर्धारित था और इसे तेहरान में क़तर नरेश की उपस्थिति से सीधे सीधे नहीं जोड़ा जा सकता लेकिन अहम बिंदु यह है कि सीरियाई विदेश मंत्री वलीद अलमुअल्लिम और शैख़ तमीम की एक साथ तेहरान में उपस्थिति ऐसी स्थिति में थी कि सीरिया के विदेश मंत्री ने तेहरान आने से पहले माॅस्को में तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोग़ान से मुलाक़ात की थी। उससे पहले रूस के राष्ट्रपति पुतीन ने दमिश्क़ का औचक दौरा किया था और राष्ट्रपति बश्शार असद से मुलाक़ात की थी। अगर इन सारी बातों को एक साथ जोड़ कर देखा जाए तो ऐसा महसूस होता है कि क्षेत्र में जल्द ही कुछ बड़ी तब्दीलियां आने वाली हैं।