ट्रम्प की ओर से इराक़ छोड़ने से अधिक ख़तरनाक, इराक़ के बारे में उनकी योजनाएं हैं। जिनका पता इस से चलता है कि अमरीकी विदेशमंत्रालय ने कहा है कि वह इराक़ में नेटो की गतिविधियां बढ़ाने का विचार कर रहा है जिसका मतलब यह है कि इराक़ के सामने नये चैलेंज खड़े किये जांएगे और इराक़ पर नये बहानों से क़ब्ज़ा किया जाएगा। इसी के साथ अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर इराक़ यह चाहता है कि हम वहां से चले जाएं तो उसे इस देश में हमारे नुक़सान की भरपाई करना होगी वर्ना हम इराक़ से नहीं निकलेंगे।
जहां तक अमरीकी विदेशमंत्रालय की इस घोषणा का सवाल है कि वह नेटो को इराक़ में सक्रिय करने पर विचार कर रहा है तो इसका यह मतलब है कि अमरीका, इराक़ को अब भी अपने क़ब्ज़े वाला देश समझता है और इराक की संप्रभुता को कोई महत्व नहीं देता और न ही इराक़ी जनता द्वारा निर्वाचित सरकार को औपचारिक रूप से स्वीकार करता है।
इराक़ के प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल मेहदी ने अमरीकियों को इराक़ी सरकार की अनुमति के बिना सैन्य सैनिक या सैन्य उपकरण इराक़ में लाने से रोक कर बहुत अच्छा किया था क्योंकि यह इराक़ी जनता का अपमान है।
जहां तक ट्रम्प की ओर से इराक़ से क्षति पूर्ति का सवाल है तो यहां मामला उल्टा है यही नहीं बल्कि यह तो बुद्धि रखने वाले हर व्यक्ति का अपमान है। इराक़ पर हमला और फिर उस पर क़ब्ज़ा की दावत इराक़ियों ने तो अमरीका को दी नहीं थी। बल्कि अमरीका ने झूठ के सहारे इराक़ पर हमला किया और फिर 12 बरसों उस पर क़ब्ज़ा कर रखा, इसके अलावा इराक़ पर कड़े प्रतिबंध लगाए जिसकी वजह से लाखों इराक़ी मारे गये और इस देश पर बमबारी की जिसमें बहुत से लोग मारे गये और यूरेनियम युक्त बमों के इस्तेमाल की वजह से आज भी उससे प्रभावित बच्चे इराक़ में पैदा हो रहे हैं।
इराक़ ही नहीं, इलाक़े में भी जो कुछ हो रहा है उन सब की ज़िम्मेदारी अमरीका की है यह सारे संकट उसी ने पैदा किये हैं, कभी इराक़ पर क़ब्ज़ा करके, कभी ईरान के साथ परमाणु समझौते से निकल कर, कभी इस्राईल को प्रोत्साहित करके और कभी ईरानी कमांडर, जनरल सुलैमानी पर हमला करके।
इराक़ी जनता महान है उसने सन 2011 में अमरीकी सैनिकों को निकाल बाहर किया था और यह कारनामा वह फिर करके दिखाएगी। जैसा कि उसके भाइयों ने अफगानिस्तान और दोस्तों ने वियतनाम में किया है। वह दिन दूर नहीं जब अमरीका, इराक़ी सरकार के सामने गिड़गिड़ाएगा जैसा कि आजकल तालिबान से सुरक्षित वापसी की गारंटी मांग रहा है।
अमरीका को यह अधिकार किसने दिया कि वह अन्य देशों की जनता का इस प्रकार से अपमान करे और उनके नायकों को इस घिनौने तरीक़े से हत्या करे और फिर उसे जवाब भी न दिया जाए? अमरीका के सुपर पावर होने की जो लोग बातें कर रहे हैं वह गुमराह करने की कोशिश है।
इराक़, अमरीकी ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने वाला नहीं है, इराक़ कोई अमरीका के बल पर तो नहीं खड़ा है, इराक़ 8 हज़ार साले से अधिक प्राचीन संस्कृति वाला देश है और अमरीकी क़ब्ज़े को अपनी पूरी ताक़त से खत्म करेगा जैसा कि सन 2011 में किया था।