नए छात्रों के रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहे वामपंथी छात्रों ने रविवार को जब रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सर्वर को तोड़फोड़ दिया, तो दोनों गुटों के बीच तनाव काफ़ी बढ़ गया और उनके बीच मारपीट हो गई।
उस समय एबीवीपी के समर्थक छात्रों की तादाद काफ़ी कम थी, और उस वक़्त कैम्पस के भीतर लगभग 10 पुलिसकर्मी भी सादा वर्दी में मौजूद थे। इसके बाद एबीवीपी के समर्थकों ने फ़ोन करके विश्विद्यालय के बाहर से अपने समर्थकों को बुला लिया और उन्हें एक कोडवर्ड भी बताया, ताकि हमला करने वाले अपने समर्थकों की पहचान कर सकें।
सूत्रों के मुताबिक़, शाम लगभग 7 बजे दर्जनों नक़ाबपोश लाठी-डंडों से लैस कैम्पस में घुसे और उन्होंने छात्रों पर हमला कर दिया। उस समय कैम्पस में अंधेरा था, जिसकी वजह से किसी की भी पहचान कर पाना मुश्किल था, इसलिए कोडवर्ड के ज़रिये हमलावरों ने इस बात की पहचान की कि किसे पीटना है और किसे नहीं।
इस हमले में जेएनयू के छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत कई छात्र बुरी तरह से लहूलुहान हो गए थे, जिन्हें AIIMS भर्ती कराया गया था।
जेएनयू में छात्रों पर हमले की देश भर में चौतरफ़ा निंदा हो रही है और कई एएमयू समेत कई विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी छात्रों के साथ हुई हिंसा की कड़ी निंदा की है।
मोदी सरकार की आलोचना करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहाः भारत के युवाओं और छात्रों की आवाज़ हर दिन दबाई जा रही है।
बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह ने भी ट्वीट करके इस घटना की निंदा की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखाः "स्ट्रीट लाइट और इंटरनेट बंद करके, सीसीटीवी कैमरे तोड़कर और मुंह छुपा कर चोर और आतंकवादी ही आते हैं।"