हसन रूहानी ने कहा है कि वर्तमान समय में इस्लामी जगत को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उभरती हुई कई प्रकार की चुनौतियों का सामना है जैसे आर्थिक, सांस्कृतिक, पहचान संबन्धी, सुरक्षा संबन्धी और उचित विकास का न होना आदि। उन्होंने कहा कि हमें अमरीकी डाॅलर और अमरीकी वित्तीय व्यवस्था से मुक्ति पाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से कुछ करना होगा। डाक्टर हसन रूहानी ने यह बात गुरूवार को क्वालालंपुर की शिखर बैठक के उद्घाटन समारोह में कही।
ईरान के राष्ट्रपति का कहना था कि विदेशियों की संस्कृति के वर्चस्व के कारण इस्लामी जगत को अपनी राष्ट्रीय पहचान के कमज़ोर होने का ख़तरा है जो गंभीर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीरिया और यमन का युद्ध एवं इराक़, लेबनान, लीबिया और अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता एवं अशांति विदेशी हस्तक्षेप और भीतरी अतिवाद का ही परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि एसे में इस्लामी देशों के बीच एकता और समरस्ता की बहुत आवश्यकता है।
राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि फ़िलिस्तीन का विषय, अब भी इस्लामी जगत का ज्वलंत मुद्दा है।उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीन के मुद्दे के प्रति निश्चेतता और आंशिक विषयों पर ध्यान देकर मतभेदों में पड़ने से हानि होगी।
ईरान के राष्ट्रपति ने क्वालालंपुर की शिखर बैठक में इस्लामी देशों के बीच तकनीकी सहयोग के लिए धन की आपूर्ति के उ्ददेश्य से एक कोष बनाने, साइबर सुरक्षा, और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में इस्लामी देशों के साझा बाज़ार का सुझाव दिया।