15 दिसंबर 2019 - 16:09
मुसलमान एक ऐसी क़ौम है, जिसे भूखा तो रखा जा सकता है, लेकिन ग़ुलामी की ज़ंजीरों में नहीं जकड़ा जा सकता

राष्ट्रीय स्यवं सेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी ने बहुत ही चालाकी से हिंदुस्तान के लोकतंत्र की इमारत की एक एक ईंट को निकाल कर उसे खोखला करके हिंदू राष्ट्र बनाने की योजना बनाई थी।

आरएसएस के हिंदू राष्ट्र का सपना उसी समय पूरा हो सकता है जब देश के 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों को मुख्य धारा से अलग थलग किया जाए। उसके लिए नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने भारतीय लोकतंत्र की रूह संविधान पर एक के बाद एक वार करने शुरू कर दिए और हर नागरिक को समान अधिकार देने वाले क़ानूनों में संशोधन करने शुरू कर दिए।

1955 के नागरिकता क़ानून में संशोधन के लिए नागरिकता संशोधन क़ानून 2019 भी इसी मक़सद से पारित किया गया है। ताकि इसके बाद पूरे देश में नेश्नल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (एनआरसी) लागू किया जा सके और मुसलमानों से उनके मौलिक अधिकार छीनकर उन्हें दूसरे और तीसरे दर्जे का नागरिक बनाया जा सके।

फ़र्स्ट पोस्ट में अंशुमन चौधरी और सूरज गोगोई के एक लेख में एनआरसी को भारतीय नागरिकता का क़ब्रिस्तान बताया गया है, तो नागरिकता संशोधन क़ानून या सीएए को भारतीय लोकतंत्र का क़ब्रिस्तान क़रार दिया। यह दोनों एक दूसरे से जुड़े हैं और इनमें से किसी एक को दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

दूरदर्शी और समझदार हिंदू चाहे वे किसी भी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करते रहे हों, बीजेपी द्वारा देश के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने के प्रयासों का मतलब समझ रहे हैं और उसके बहुत ही घातक परिणामों से अवगत हैं, इसीलिए वे इसके ख़िलाफ़ मुसलमानों के कांधे से कांधा मिलाकर खड़े हैं।

उन्हें पता है कि हिंदुस्तान कोई ऐसा देश नहीं है या हिंदू कोई ऐसी क़ौम नहीं है, जिसे हिंदुओं की हिफ़ाज़त के नाम पर दुनिया से काट कर रख दिया जाए। विश्व में भारत की अहिंसावादी और धर्मनिर्पेक्ष की जो छवि शताब्दियों के प्रयासों से गढ़ी गई थी, उदारवादी हिंदू उसे कुछ ही वर्षों में नष्ट करने की अनुमति कभी नहीं देगा।  

हिंदुस्तान में जो संकट पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है उसका चेहरा बहुत ही भयानक है। अगर यह गहरा गया तो कोई ताक़त देश के टुकड़े टुकड़े होने से नहीं रोक सकती।         

कांग्रेस के प्रवक्ता संजय झा का कहना है कि नागरिकता संशोधन क़ानून, देश में ध्रुवीकरण की बीजेपी की एक गहरी विभाजनकारी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

मुसलमान आज अगर बीजेपी की विभाजनकारी नीतियों के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं तो वे अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं। क्योंकि अगर उन्होंने आज ऐसा नहीं किया तो भविष्य में बड़ी से बड़ी क़ुर्बानियां देकर भी वे अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकेंगे। वैसे भी मुसलमान एक ऐसी क़ौम है, जिसे भूखा तो रखा जा सकता है, लेकिन ग़ुलाम बनाकर नहीं रखा जा सकता।