11 दिसंबर 2019 - 15:59
गुटेरस ने सऊदी तेल रिफ़ाइनरी पर हमले में ईरान के लिप्त होने की पुष्टि नहीं की, अमरीका व सऊदी अरब की एक और हार

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने कहा है कि यह संघ इस दावे की पुष्टि नहीं कर सकता कि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले में ईरानी हथियारों का इस्तेमाल किया गया है।

अंटोनियो गुटेरस ने मंगलवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ इस बात की पुष्टि नहीं कर सकता कि सितम्बर में सऊदी अरब की आरामको तेल कंपनी के प्रतिष्ठानों पर हमले के लिए जिन मीज़ाइलों व ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया था, उनका आरंभिक स्रोत ईरान है। ज्ञात रहे कि 14 सितम्बर को सऊदी अरब की आरामको तेल कंपनी की रिफ़ाइनरियों पर ड्रोन और मीज़ाइलों से हमले किए गए थे जिनके कारण इस कंपनी को भारी नुक़सान पहुंचा था और सऊदी अरब का तेल निर्यात कम हो गया था। यमन की सेना और स्वयं सेवी बलों ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकार कर ली थी लेकिन अमरीका, सऊदी अरब और कुछ पश्चिमी देशों ने यह दावा किया था कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ है।

 

ईरान के ख़िलाफ़ यह दावे दो तरह से किए गएः एक तो यह कि ये ड्रोन और मीज़ाइल, जिनसे आरामको पर हमला किया गया, ईरान के बने हुए थे। दूसरे यह कि ये हमले ईरान के अंदर से किए गए। सऊदी अरब ने 18 सितम्बर को लोहे के कुछ टुकड़ों का प्रदर्शन करके दावा किया कि ये ईरान के एक क्रूज़ मीज़ाइल और ड्रोन विमानों के बाक़ी बचे टुकड़े हैं जिन्हें आरामको पर हमले के लिए इस्तेमाल किया गया था। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने उसी समय दावा किया था कि आरामको पर हमला, यमन से नहीं किया गया है बल्कि सऊदी अरब के उत्तर से किया गया है और निश्चित रूप से यह हमला ईरान की मदद से हुआ है।

 

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव की रिपोर्ट से जो नतीजे निकाले जा सकते हैं वह कुछ इस प्रकार हैंः सबसे पहले तो यह कि अंसारुल्लाह को ड्रोन और मीज़ाइलों से लैस करने के बारे में ईरान के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के जितने भी दावे हैं वे निराधार और झूठ हैं। दूसरे यह कि अंसारुल्लाह संगठन, अली अब्दुल्लाह सालेह के राष्ट्रपति काल के बचे हुए मीज़ाइलों को इस्तेमाल कर रहा है। तीसरे यह  कि यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के सैन्य हमले को शुरू हुए चार साल का समय बीत जाने के बाद भी यमन की सेना और स्वयं सेवी बल, सऊदी गठजोड़ के हवाई और ज़मीन हमलों का उचित उत्तर दे रहे हैं। चौथे यह कि यमन की जंग से जान छुड़ाने की सऊदी अरब की कोशिश, विकसित हथियार बनाने में यमनियों की क्षमता को लेकर रियाज़ की चिंता को स्पष्ट करती है। इससे युद्ध के ज़मीनी व राजनैतिक परिवर्तनों पर काफ़ी प्रभाव पड़ेगा और आरामको पर हमले जैसी कार्यवाहियां जारी रहने की स्थिति में सऊदी अरब तबाह हो जाएगा। पांचवें यह कि सऊदी अरब ईरान के ख़िलाफ़ निराधार दावे करके और ईरान को अपने लिए ख़तरा बता कर, क्षेत्र में अपने विध्वंसक रवैये पर पर्दा नहीं डाल सकता और न ही इस रवैये पर आने वाली स्वाभाविक प्रतिक्रियाओं से बच सकता है। अंतिम बात यह कि अगर यमन की सेना और अंसारुल्लाह ने इसी तरह के और हमले कर दिए तो फिर सऊदी अरब, अपने ईरान विरोधी आरोपों को दोहरा नहीं पाएगा। (HN)