3 दिसंबर 2019 - 16:56
इराक संकट, क्या आदिल अब्दुल मेहदी के त्यागपत्र से संकट खत्म होगा? कौन देश, इराक़ में अराजकता फैला रहे हैं? अब्दुलबारी अतवान का ज

अरब जगत के प्रसिद्ध पत्रकार अब्दुल बारी अतवान ने इराक़ी प्रधानमंत्री आदिल अब्दुलमेहदी के त्यागपत्र के बाद इस देश के संकट और उसके कारणों का जायज़ा लिया है जो काफी रोचक है।

     इराक़ के प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल मेहदी के  त्यागपत्र को , इराकी जनता की मांगों के सामने पहली बार पीछे हटने का चिन्ह कहा जा रहा है। यह त्यागपत्र दर अस्ल जनता के सामने सरकार के पीछे हटने का आरंभ है क्योंकि वास्तव में अगर देखा जाए तो इराक़ी जनता की मुख्य मांग त्याग पत्र नहीं बल्कि बड़े सरकारी पदों पर आसीन सभी लोगों को हटाने की वह मांग कर रही है। इराकी जनता की मांग सभी भ्रष्ट नेताओं को हटाया जाना, अमरीका के ब्रेमर के संविधान को खत्म करना, सुधार लाना, सामाजिक न्याय लाना मतलब सभी संकटों की मुख्य वजह अमरीकी विरासत को पूरी तरह से खत्म करना है।

 आदिल अब्दुल मेहदी को चूंकि क़बाइली सरदारों और प्रभावी हस्तियों का समर्थन प्राप्त नहीं था इस लिए वह बेहद कमज़ोर थे और इसी वजह से सुधार करना उनके बस में नहीं था। आदिल अब्दुलमेहदी ने त्यागपत्र देने में काफी देर कर दी और यह भी कहा है कि यह त्यागपत्र वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह सीस्तानी की मांग पर दिया गया है।

     आयतुल्लाह सीस्तानी ने आदिल अब्दुल मेहदी से त्याग पत्र मांग कर बहुत अच्छा काम किया है क्योंकि इससे खून खराबा बंद होगा लेकिन लोगों को इस से अधिक आशा है, लोग, भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कार्यवाही चाहते हैं। इराकी जनता, गत  16 वर्षों में एक ट्रिलयन डालर से अधिक के भ्रष्टाचार की जांच और उसकी राष्ट्रीय खज़ाने में वापसी, राष्ट्रीय एकता की मज़बूती, सांप्रदायिकता का अंत, इराक़ी सेना में सुधार और अमरीकी सैनिकों सहित सभी विदेशी सैनिको को देश से बाहर निकाले जाने की इच्छुक है।

     जिन लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलायी उन्हें ज़रूर सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन हमें उन लोगों पर हैरत होती है जो अमरीका और उसके अरब मित्रों को, जन प्रदर्शनों से गलत फायदा उठाने, उसे राह से भटकाने, इराकी सरकार को गिराने और इराक़ में गृहयुद्ध छेड़ने की साज़िश से बरी करने की कोशिश करते हैं। यह सारी कोशिश इस लिए है ताकि इराक़ एक सफल देश बन कर फिलिस्तीन के साथ सहयोग न कर सके। इराक़ की सारी समस्याओं की जड़ में अमरीका है, अमरीका ने इस देश पर क़ब्ज़ा करके इराक़ का यह हाल किया है। इराक़ हमेशा ही अमरीका व इस्राईल के खिलाफ मोर्चे में डटा रहा सिवाए उन कुछ वर्षों के जब इस देश पर अमरीका का क़ब्ज़ा था। (Q.A.) साभार, रायुल यौम, लंदन