29 नवंबर 2019 - 18:12
सऊदी अरब का दावा निरा झूठ हैः यमनी

यमनियों का कहना है कि ईश्वर की कृपा से अहंकारी दुश्मन की नाक रगड़ दी गयी है और अत्याचारी हमारे जियालों व संघर्षकर्ताओं को आज़ाद करने पर मजबूर हो गये।

सउदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर कहा है कि बीमारों के उपचार के लिए यमन की राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को खोल दिया गया है पंरतु हवाई अड्डे के अधिकारियों ने इस दावे का खंडन किया है और बल देकर कहा है कि यह दावा निरा झूठ है। उन्होंने कहा कि उपचार के लिए अभी तक कोई फ्लाइट नहीं उड़ी है और उम्मीद है कि सऊदी सरकार अपने वचनों पर अमल करेगी।

जानकार सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब यमनी सेना और यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के साथ जो भी समझौता करता है आम तौर पर उस अमल नहीं करता है। इन जानकार हल्कों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में सऊदी अरब यमनी सेना और अंसारुल्लाह के साथ समझौता कर लेता है परंतु व्यवहारिक रूप से वह इन समझौतों पर अमल नहीं करता है।

इसी बीच यमन से एक खबर यह है कि सऊदी अरब ने बंदी बनाये गये 128 यमनियों को स्वतंत्र कर दिया है। सऊदी अरब से रिहा होने वाले यमनी, सना हवाई अड्डे पर पहुंचे जहां यमनी जनता ने उनका स्वागत किया।

यहां कोई यह कह सकता है कि सऊदी अरब यमन युद्ध को बंद करना चाहता है और सद्भावना के तौर पर उसने इन बंदियों को छोड़ भी दिया है परंतु इसके जवाब में यमनियों का कहना है कि उनके जवाबी हमलों से मजबूर सउदी अरब ने इन बंदियों को छोड़ा है। एक यमनी का कहना है कि ईश्वर की कृपा से अहंकारी दुश्मन की नाक रगड़ दी गयी है और अत्याचारी हमारे जियालों व संघर्षकर्ताओं को आज़ाद करने पर मजबूर हो गये।

ज्ञात रहे कि 26 मार्च 2015 में सऊदी अरब ने अमेरिका और संयुक्त अरब इमारात सहित कुछ देशों के समर्थन से यमन के खिलाफ हमला आरंभ किया था जो अब तक जारी है।

सऊदी अरब के इस पाश्विक हमले में अब तक दसियों हज़ार यमनी हताहत व घायल हो चुके हैं जिनमें ध्यान योग्य संख्या बच्चों और महिलाओं की है। इसी प्रकार सऊदी अरब ने यमन का कड़ा ज़मीनी, हवाई और समुद्री परिवेष्टन कर रखा है जिसके कारण यमनी जनता को खाद्य पदार्थों और दवाओं सहित विभिन्न ज़रूरी चीज़ों की भारी कमी का सामना है। इस परिवेष्टन के कारण किसी भी यमनी को उपचार कराने के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गयी जिसकी वजह से भी बहुत से यमनी अपनी जान से हाथ धो बैठे।

यही नहीं मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले देश भी सऊदी अरब के अपराधों पर अर्थपूर्ण मौन धारण किये हुए हैं और उनके मौन समर्थन के कारण सउदी अरब यमनी जनता के जनसंहार में किसी प्रकार के संकोच से काम नहीं लेता है।

यही नहीं मानवाधिकारों की राग अलापने वाले देश कभी भी सऊदी अरब के अपराधों की भर्त्सना तक नहीं करते। यही नहीं मानवाधिकारों की राग अलापने वाले देश न केवल सउदी अरब के अपराधों की भर्त्सना नहीं करते बल्कि उसे आधुनिकतम हथियारों से लैस भी करते हैं और उन्हीं हथियारों से सउदी अरब यमनी जनता की हत्या करता है।

बहरहाल जब तक सऊदी अरब को अमेरिका जैसे वर्चस्ववादी व अहंकारी देश का समर्थन प्राप्त रहेगा तब तक यमनी जनता के खिलाफ होने वाले अपराधों के बंद होने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।