24 नवंबर 2019 - 17:17
ईरान के बारे में अमरीका हमेशा सपने देखता है लेकिन यह सपने हमेशा सपने ही रह जाते हैं, अब ट्रम्प और पोम्पेयो की सपने देखने की बारी

ईरान में इस्लमी क्रांति की सफलता और इस्लामी व्यवस्था की स्थापना के बाद से ही इस देश के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाए रहा और इस परिधि में ईरान के विरुद्ध बासी शासन द्वारा थोपे गये युद्ध,उसके बाद ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध अनेक तरह के दावे करना तथा उसके बाद प्रतिबंध लगाने जैसी कार्यवाहियां करके अपनी घटिया सोच में ईरान का तख़्ता उलटकर ईरान पर ज़्यादा से ज़्यादा दबाव डालने की दिशा में प्रगति की।

ईरान के विरुद्ध पश्चिम के इन प्रयासों में उनका मुखिया अमरीका है और अमरीका के विभिन्न राष्ट्रपतियों ने चाहे वे डेमोक्रेट्स हों या रिपब्लिकन, पिछले 4 दशकों में विभिन्न रूपों में अनेक नीतियां अपनाकर ईरान में इस्लामी लोकतांत्रिक सरकार का तख़्ता उलटने और इस देश को कमज़ोर करने का परिणामहीन प्रयास किया।

ईरान में 15 नवम्बर शुक्रवार से तेल के मूल्यों में वृद्धि के बहाने होने वाले हालिया उपद्रव, पश्चिम की नज़र में विशेकषकर अमरीका और कुछ यूरोपीय देशों के निकट ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए बहुत ही बेहतरीन अवसर था और इसी परिधि में उन्होंने न केवल खुलकर असामाजिक तत्वों का समर्थन किया बल्कि अपनी सोच में अराजक तत्वों के ख़िलाफ़ कार्यवाही न करने के लिए ईरान पर दबाव डालने का भी प्रयास किया। यह ऐसी हालत में है कि साक्ष्यों और सबूतों से पता चलता है कि ईरान में अशांति को हवा देने और अराजकता फैलाने के पीछे एक व्यवस्थित कार्यक्रम चल रहा था। हंगामों के दौरान व्यापक स्तर सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाना, इस बात का चिन्ह है कि यह काम आम लोगों का नहीं है बल्कि पहले से लिखे गये ड्रामे की स्क्रिप्ट  पर काम हुआ है।

अमरीका के विवादित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने हमेशा से ही ईरान के विरुद्ध ज़हर उगला हैं और उन्होंने तेहरान के विरुद्ध अनेक प्रकार के दबाव डाले ताकि ईरान, वाशिंग्टन की मांगों के आगे घुटने टेक दे। इसी के साथ डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए ईरानी जनता का दुखड़ा रोने का ढोंग रचना शुरु कर दिया। इसी परिधि में वाइट हाऊस ने रविवार 17 नवम्बर को एक हस्तक्षेपपूर्ण बयान जारी करते हुए ईरान के विरुद्ध निराधार दावा दोहराया और उन कुछ असामाजिक तत्वों का जिन्होंने पेट्रोल के मूल्यों में वृद्धि के बहाने ईरान के कुछ शहरों में अशांति फैलाने का प्रयास किया और सार्वजिक व सरकारी चीज़ों को बर्बाद किया, समर्थन किया।

वाशिंग्टन के बयान में आया है कि अमरीका, ईरानी सरकार के विरुद्ध जनता के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन करता है, हम हत्यारे सैनिकों और जनता के विरोध प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ सीमित्ताएं लगाए जाने की निंदा करते हैं। वाइट हाऊस के इस बयान का अमरीका के विदेशमंत्रालय ने भी समर्थन किया। ईरान के मामले में अमरीका के विशेष दूत ब्रायन हुक ने सोमवार 18 नवम्बर को अपने हस्तक्षेपूर्ण बयान में ईरान के विरुद्ध निराधार आरोप दोहराते हुए खुलकर घोषणा की कि अमरीका पूरी शक्ति के साथ ईरान में अराजक तत्वों और फ़सादियों का समर्थन करता है।

अमरीका के विदेशमंत्री माइक पोम्पेयो भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी अमरीका के पुराने इतिहास को दोहराते हुए शनिवार 16 नवम्बर की रात भड़काऊ ट्वीट किया। उन्होंने ईरान के कुछ गिने चुने शहरों में छिटपुट प्रदर्शनों की ओर संकेत करते हुए दावा किया था कि वाशिंग्टन, ईरानी जनता का समर्थन करता है। ईरान का यह मानना है कि ट्रम्प सरकार, देश की वर्तमान स्थिति से ग़लत लाभ उठाकर अपने घिनौने लक्ष्य साधने के प्रयास में है और  ईरान और ईरानियों के बारे में कभी भी उसके नेक इरादे नहीं रहे हैं।

मैक एडम्ज़ ने मंगलवार 19 नवम्बर को आरटी से बात करते हुए ईरान में हालिया अशांति के बारे में कहा कि ईरान के हालिया हालात, केवल तेल के मूल्यों में वृद्धि का परिणाम नहीं हैं बल्कि ईरान में अमरीका के घटकों और सीआईए का अनुसरण करते हुए की जाने वाली कार्यवाहियों का परिणाम है। मैक एडम्ज़ उदाहरण स्वरूप एमकेओ आतंकी संगठन को ईरान में अमरीका के घटक के रूप में याद करते हैं और कहते हैं कि इस प्रकार की अधिकतर अशांति, सीआईए की देन है जो ट्रम्प सरकार ने शुरु की है और पिछले वर्ष इसकी ज़िम्मेदारी माइकल डी एंड्रिया के हवाले की गयी जिसे आयतुल्लाह माइक का निक नेम दिया गया था।

न्यूयार्क टाइम्ज़ ने अपनी रिपोर्ट में ईरान में अशांति फैलाने में सीआईए की भूमिका का पर्दा फ़ाश किया था और इसकी ज़िम्मेदारी डी एंड्रिया की थी और सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब इमारत की ओर से इसका समर्थन हो रहा था।

ईरान के हालिया हंगामों की प्रवृत्ति पर नज़र डालने से तथा रिपोर्टों और अमरीकी अधिकारियों के बयान को देखने से पता चलता है कि अमरीकियों ने ईरान में प्रदर्शन शुरु होने से पहले ही व्यापक कार्यक्रम बना लिए थे। अमरीका के डेमोक्रेटे सांसद गेरी गोनोली ने ईरान में होने वाले हालिया हंगामों से पहले ही दावा किया था कि पूरे ईरान भर में होने वाले दंगों से पता चलता है कि धर्मगुरुओं की सत्ता की उलटी गिनती शुरु हो गयी है और ईरान को अधिक से अधिक स्वतंत्रता की आवश्यकता है।

ज़ायोनी समाचार पत्र हारेट्ज़ ने भी इससे पहले अपने संस्करण में अमरीका के अधिकारियों के हवाले से लिखा था कि अमरीकी राजनेताओं का मानना है कि ईरानी सरकार को गिराने के लिए सुनहरा मौक़ा है।

बहरहाल ईरान के हालिया हंगामों के बारे में अमरीका, यूरोप और ज़ायोनी शासन के समान दृष्टिकोण से पता चलता है कि ट्रम्प सरकार, ईरान के बारे में बुरी पुलिस तथा यूरोपीय ट्राइका और यूरोपीय संघ के अच्छी पुलिस की भूमिका अदा करने के बावजूद ईरान का कुछ भी नहीं बिगाड़ सके। ईरान से इन सबकी दुश्मनी का एक ही लक्ष्य है और वह ईरान की व्यवस्था गिराना।