15 नवंबर 2019 - 17:59
इस्लाम के शत्रुओं के षडयंत्रों का समाधान सच के मार्ग में कड़े प्रतिरोध और लोगों को जागरूक बनाने में निहित हैः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि इस्राईल के अंत का अर्थ यह है कि फ़िलिस्तीन के वास्तविक मालिक अपनी सरकार का चयन कर सकें।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई का कहना है कि इस्राईल का अंत अवैध ज़ायोनी शासन की समाप्ति और फ़िलिस्तीन के वास्तविक मालिकों अर्थात यहूदियो, इसाइयों तथा मुसलमानों द्वारा अपनी सरकार के संचालन  के अर्थ में है। 

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने एकता सप्ताह में भाग लेने आए अतिथियों से शुक्रवार को तेहरान में भेंट के दौरान कहा कि इस्लाम के शत्रु जिनमें अमरीका सर्वोपरि है, वास्तव में इस्लाम और सभी इस्लामी देशों के विरोधी हैं।  उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शत्रुओं का मुख्य काम संवेदनशील केन्द्रों तक पहुंच बनाना, राष्ट्रों के बीच मतभेद फैलाना और लोगों के दिमाग़ में इस बात को भरना है कि समस्याओं का समाधान, केवल अमरीका के समाने माथा टेकने में ही है।  वरिष्ठ नेता का कहना था कि शत्रु के इन षडयंत्रों का समाधान सच के मार्ग में कड़ा प्रतिरोध और लोगों को जागरूक बनाना है।आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि एकता के लिए पहला क़दम यह है कि इस्लामी पंथ, मुस्लिम राष्ट्र और सरकारें एक-दूसरे को क्षति पहुंचाने से बचें।  उन्होंने कहा कि इसके बाद वाले चरण में इस्लामी देशों का दायित्व बनता है कि नई इस्लामी सभ्यता की प्राप्ति के लिए वे एक-दूसरे को ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा, सुरक्षा और राजनीतिक शक्ति बढ़ाने में सहयोग करें।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने इसी को अपना लक्ष्य बनाया है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लामी जगत की समस्याओं के संदर्भ में फ़िलिस्तीन समस्या, यमन युद्ध और पश्चिमी एशिया एवं उत्तरी अफ़्रीका में जारी रक्तरंजित झड़पों की ओर संकेत किया।  उन्होंने कहा कि यह सब संयुक्त शत्रु के मुक़ाबले में एकजुट न होने के कारण है।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि वर्तमान समय में इस्लामी जगत की ज्वलंत समस्या फ़िलिस्तीन संकट है।  उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र को उसके ही घर से निकाल बाहर किया गया है।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने  इस्राईल के अंत के संदर्भ में कहा कि इस संबन्ध में स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी और ईरानी अधिकारियों के वक्तव्यों को बदलकर पेश किया जा रहा है।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्राईल का अंत, यहूदियों की समाप्ति के अर्थ में नहीं है।  हमें उनसे कोई समस्या नहीं है।  ईरान में भी यहूदी समुदाय सुख और शांति के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है।  उन्होंने कहा कि हम फ़िलिस्तीनियों के समर्थक हैं और उनको मुक्ति दिलाना चाहते हैं।  वरिष्ठ नेता ने कहा कि फ़िलिस्तीनी जनता ही फ़िलिस्तीन के वास्तविक स्वामी हैं अब वे चाहे मुसलमान हों, इस्राईल हों या यहूदी।  इन सबको अपनी इच्छा के अनुसार सरकार के गठन का अधिकार है।  वरिष्ठ नेता का कहना था कि फ़िलिस्तीनियों को चाहिए कि वे नेतनयाहू जैसे विदेशी ग़ुडे-मवाली को निकाल बाहर करें और स्वंय अपने देश का संचालन करें।  इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि ऐसा होकर रहेगा।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लामी विद्धानों और धर्मगुरूओं की ज़िम्मेदारी को बहुत ही महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पूरी शक्ति के साथ सच का साथ दीजिए और शत्रु से बिल्कुल नहीं डरिए।  वरिष्ठ नेता का कहना था कि यह जान लीजिए कि ईश्वर की कृपा से इस्लामी जगत निकट भविष्य में अपनी आकांक्षाओं को पूरा होते हुए देखेगा।