तेहरान में मस्जिदुल अक़सा की रक्षा के लिए इस्लामी जगत की एकता के नारे के साथ आयोजित अंतर्राष्ट्रीय इस्लामी एकता कांफ़्रेंस में 400 विदेशी और स्थानीय मेहमान, बुद्धिजीवी, धर्मगुरु ओर महत्वपूर्ण हस्तियां शामिल हैं।
यह कांफ़्रेंस गुरुवार की सुबह शुरु हुई और शनिवार तक जारी रहेगी। इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ़्रेंस में एकता, एकजुटता, सभ्यता, संस्कृति, अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों, मुसलमानों की समस्याओं और इस्लामी जगत के विरुद्ध होने वाले षड्यंत्रों पर चर्चा की जाएगी।
इस्लामी मतों की समन्वयक संस्था के प्रमुख ने इस्लामी जगत में एकता के संदेश की गूंज,विस्तार और इसी प्रकार तकफ़ीरियों के एक किनारे लगने को साम्राज्यवादी शक्तियों पर प्रतिरोधकर्ता गुटों की सफलता का परिणाम क़रार दिया।
आयतुल्लाह मोहसिन अराकी ने 33वीं अंतर्राष्ट्रीय इस्लामी एकता कांफ़्रेंस के उद्घाटन कार्यक्रम में कहा कि एकता और एकजुटता की सोच ने तकफ़ीरियों और मतभेद के बीज बोने वाली सोच पर विजय प्राप्त कर ली है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में मस्जिदुल अक़सा और फ़िलिस्तीन की रक्षा अतीत की तुलना में मुसलमानों और दुनिया वालों के लिए बहुत ज़रूरी हो गयी है।
आयतुल्लाह मोहसिन अराकी ने फ़िलिस्तीन और क्षेत्र के अन्य देशों में प्रतिरोधक मोर्चे की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि प्रतिरोध के मोर्चे की सफलता ने इस मोर्चे को मज़बूत बना दिया है।इस कांफ़्रेंस में दुनिया के 81 देशों से 350 विदेशी मेहमान शामिल हैं। इस कांफ़्रेंस में शामिल मेहमान इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई से भी मुलाक़ात करेंगे।