जिस समय आपका जन्म हुआ उस काल तक यह नाम लोगों में नहीं रखा जाता था। दूसरे शब्दों में आम लोग इस नाम से परिचित नहीं थे किंतु आसमानी किताबों में मुहम्मद नाम का उल्लेख अवश्य मिलता है। हालांकि वर्तमान समय में शायद ही कोई होगा जिसने मुहम्मद का नाम न सुना हो। वर्तमान समय में एक अरब से अधिक लोग इस पवित्र नाम के प्रति अथाह श्रद्धा रखते हैं। यह सारे के सारे लोग उनके लिए अपनी जान तक न्योछावर करने को हमेशा तैयार हैं।
अपने जीवन के दौरान मानवजाति सदैव ही एक आदर्श के तलाश में रही है। मनुष्य सदा ही एसे आदर्श को ढूंढता रहा है जिसका वह अपने जीवन में अनुसरण करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल कर सके। आदर्श वह मुद्दा है जिसका उल्लेख प्रशिक्षण, मनोविज्ञान, प्रबंधन, तत्वदर्शिता और बहुत से अन्य विषयों में किया गया है। इस्लाम ने भी आदर्श जैसे विषय को अनदेखा नहीं किया है। इस्लमा ने जीवन के लिए एसे आदर्श पेश किये हैं जो मनुष्य को परिपूर्णता तक पहुंचा सकते हैं। पवित्र क़ुरआन के सूरे अहज़ाब की आयत संख्या 21 में ईश्वर कहता है कि निश्चित रूप से अनुसरण करने के उद्देश्य से तुम्हारे लिए रसूल का अनुसरण उचित है। यह उनके लिए अच्छा है जो ईश्वर और प्रलय पर विश्वास रखते हैं और ईश्वर का अधिक स्मरण करते हैं।
पवित्र क़ुरआन की यह आयत सभी मुसलमानों के लिए है। इसमे समय या स्थान को सीमित या निर्धारित नहीं किया गया है अर्थात इस आयत का संबन्ध विगत से लेकर भविष्य तक है। इसका अर्थ यह है कि पैग़म्बरे इस्लाम हर मुसलमान के लिए हर काल में आदर्श थे, हैं और रहेंगे। वास्तव में रसूले ख़ुदा की पैग़म्बरी पर विश्वास रखने का अर्थ, उनकी शिक्षाओं को मानते हुए उनके मार्ग का अनुसरण करना है। हज़रत मुहम्मद ने मानवजाति के कल्याण के लिए अथक प्रयास किये और बहुत सी कठिनाइयां सहन कीं।
पैग़म्बरे इस्लाम (स) ने इस्लाम की रक्षा और मुसलमानों के कल्याण के लिए हर प्रकार की समस्याओं का सामना किया किंतु वे किसी भी चरण पर न तो घबराए और न ही पीछे हटे।दूसरे मोमिनो के साथ वे सामान्य से काम भी किया करते थे जैसे खंदक़ खोदने के लिए वे फावड़े से मिट्टी खोदते थे, लोगों का मनोबल ऊंचा करने के लिए उनको साहस दिलाते थे, वे उनको पवित्र क़ुरआन की आयतें पढ़कर सुनाते थे। वे मुसलमानों को मिथ्याचारियों के षडयंत्रों से सचेत किया करते थे। पैग़म्बरे इस्लाम, मुसलमानों को युद्ध की तकनीक सिखाते थे। शत्रुओं से लोगों को सदैव की सचेत रखते थे। इस प्रकार कहा जा सकता है कि पैग़म्बरे इस्लाम (स) जीवन के हर क्षेत्र में लोगों के लिए सबसे अच्छा आदर्श हैं।
ईश्वर ने पैग़म्बरे इस्लाम को नैतिका का आदर्श बताते हुए सूरे क़लम की चौथी आयत में कहा है कि तुम नैतिकता के उच्च चरण पर हो। ईश्वर कहता है कि आप अपने सदगुणों और अच्छे आचरण के कारण ही ईश्वरीय संदेश पहुंचाने में सफल रहे। इसके बाद उनकी हमदर्दी की तरफ इशारा करते हुए कहता है कि तुम लोगों के बीच एसा रसूल आया जो हमदर्द है और तुम्हारे दुख उसके लिए असहनीय हैं। जैसा कि ख़ुद पैग़म्बरे इस्लाम फ़रमाते हैं कि मैं इसलिए पैग़म्बरी के लिए नियुक्त हुआ हूं कि नैतिकता को उसके चरम पर पहुंचाऊं। स्वंय ईश्वर ने पैग़म्बरे इस्लाम के शिष्टाचार की तारीफ़ में पवित्र क़ुरआन में कहा है कि हे पैग़म्बर अगर आप अच्छे स्वभाव के न होते तो लोग आपसे दूर हो जाते। पैग़म्बरे इस्लाम का मेहरबान स्वभाव हर एक को सम्मोहित कर लेता था।
पैग़म्बरे इस्लाम (स) अद्वितीय व्यक्तित्व के स्वामी हैं। उन्होंने बहुत ही अच्छे ढंग से ईश्वरीय संदेश को लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने बड़ी निर्भीकता के साथ बड़े-बड़े निर्णय लिए। वे बहुत ही दूरदर्शी थे। अत्यधिक दान-दक्षिणा करने वाले थे। वे साधारण जीवन गुज़ारते और बहुत ही सादा खाना खाते थे। आपके व्यक्तित्व में बहुत आकर्षण था। जो भी उनको देखता था वह उनकी ओर आकृष्ट अवश्य होता था। वे ईश्वर की प्रशंसा के लिए हर काम करते थे। अपना समय व्यर्थ की बातों और व्यर्थ के कामों में नहीं लगाते थे। इस बारे में पैग़म्बरे इस्लाम के एक साथी "अनस बिन मालिक" कहते हैं कि मैं दस वर्षों तक हज़रत मुहम्मद (स) के साथ रहा किंतु ईश्वर की सौगंध, मैंने कभी भी उनके मुंह से कोई आपत्तिजनक या दुख पहुंचाने वाली बात नहीं सुनी। उन्होंने मुझको किसी भी काम पर नहीं डांटा।
वे लोगों के प्रति बहुत ही मेहरबान थे। उनके भीतर भेदभाव नहीं पाया जाता था। वे अपने साथियों का बहुत ध्यान रखते थे और उनको हिम्मत बंधाया करते थे। अगर वे किसी को तीन दिनों तक नहीं देखते तो दूसरों से उसके बारे में पूछते थे। वह व्यक्ति अगर यात्रा पर गया होता तो उसके लिए दुआ करते और अगर घर पर मौजूद होता तो उससे मिलने जाया करते थे। उनकी एक विशेषता यह थी कि शत्रु भी उनका सम्मान करते और उनसे आशा रखते थे। कोई उनसे भयभीत नहीं रहता था। बद्र के युद्ध में मुसलमानों ने पानी के स्रोतों पर नियंत्रण कर लिया और फिर वहां पर एक हौज़ बनाकर पानी एकत्रित किया। जब शत्रु पानी के लिए उस स्थान पर आए तो पैग़म्बरे इस्लाम ने मुसलमानों को आदेश दिया था कि वे उनके मार्ग में बाधा न बनें। वे न्यायप्रिय थे और हर फैसला न्याय के आधार पर किया करते थे। इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम कहते हैं कि पैग़म्बरे इस्लाम, लोगों को इस तरह से देखते थे कि वे यह न सोचें कि हमको अधिक और दूसरों को कम चाहते हैं। आप दूसरों को न्यायपूर्ण दृष्टि से देखते थे।
मानव जाति की एक विशेषता बुद्धिमानी का प्रयोग है। पैग़म्बरे इस्लाम इसी विशेषता के आधार पर लोगों से व्यवहार किया करते थे। लोगों के दिल व दिमाग़ में वे पूरी तरह से बस गए हैं। वास्तव में हज़रत मुहम्मद (स) बहुत महान व्यक्ति थे। उनकी महानता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करके कई लोग महानता के उच्च शिखर तक पहुंचे। पैग़म्बरे इस्लाम में जहां पर नैतिक विशेषताएं कूट-कूट कर भरी हुई थीं वहीं पर उनकी एक विशेषता यह थी कि उन्होंने धरती पर एसी महाक्रांति उत्पन्न की जिसका उदाहरण पूरे इतिहास में कहीं भी नहीं मिलता है।
पैग़म्बरे इस्लाम के संदर्भ में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई कहते हैं कि ईश्वर ने हम मुसलमानों को पैग़म्बरे इस्लाम के अनुसरण का आदेश दिया है। यह अनुसरण जीवन के हर क्षेत्र में है। वे कहते हैं कि हज़रत मुहम्मद (स) का जीवन मुसलमानों के लिए प्रत्येक क्षेत्र में अनुसरण के लिए आदर्श है। वरिष्ठ नेता के अनुसार हमारा इस्लामी समाज उस समय सही अर्थों में इस्लामी समाज बन सकता है जब हमसब स्वयं को पैग़म्बरे इस्लाम के व्यवहार के अनुरूप बनाएं। वे कहते हैं कि यह बात सही है कि हम पैग़म्बरे इस्लाम के व्यवहार को शत-प्रतिशत अपने जीवन में उतार नहीं सकते किंतु कम से कम उसकी एक झलक तो पैदा कर सकते हैं।