यह लड़ाई अमरीकी फ़ोर्सेज़ के ख़िलाफ़ होगी जिन्होंने इस इलाक़े में तेल और गैस के भंडारों पर क़ब्ज़ा कर लिया है। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस इलाक़े में तेल और गैस के कुओं की सुरक्षा के लिए सैनिक अभियान विस्तृत करने की अनुमति दी है। यहां उन्होंने 800 अमरीकी सैनिक तैनात कर दिए हैं जबकि 200 सैनिक क़रीब ही स्थित तनफ़ छावनी में तैनात हैं।
कई चीज़ें हैं जिन्हें देखते हुए हमें यह लड़ाई नज़दीक नज़र आ रही है।
- रूस के विदेश उपमंत्री सर्गेई शेरवीनिन का बयान है जिसमें उन्होंने बुधवार को कहा कि उनका देश सीरिया के तेल के मामले में अमरीका से कोई सहयोग नहीं करेगा क्योंकि यह सीरियाई राष्ट्र की संपत्ति है इसलिए इसके सारे मामले सीरियाई सरकार के हाथ में दिए जाने चाहिए। इस बयान का मतलब साफ़ है कि रूस इस मामले में सीरियाई सरकार की भरपूर मदद के लिए तैयार है।
- अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का दो दिन पहले का बयान है जिसमें उन्होंने कहा कि अमरीका को अधिकार है कि तेल और गैस के इन कुओं को अपने नियंत्रण में रखे इसका एक भाग ख़ुद ले और दूसरा भाग कुर्दों को दे और इस इलाक़े को अमरीकी कंपनियों के लिए खोल दे कि वह यहां मौजूद तेल का प्रबंध संभालें।
- सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद का अलअख़बारिया टीवी चैनल को दिया गया इंटरव्यू है जिसमें उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि सरकार और सेना ने संकल्प कर लिया है कि इस इलाक़े को आज़ाद कराया जाएगा लेकिन उन्होंने कहा कि इसके लिए अलग प्रकार के तरीक़े अपनाए जाएंगे। शायद उनका इशारा प्राक्सी संगठनों के प्रयोग की ओर हो जिस तरह इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर इसी तरह के संगठनों के माध्यम से भारी हमले करवाए गए थे और अमरीका को 5000 सैनिक गंवाने के बाद इराक़ से अपने सैनिकों को बाहर निकालने का एलान करना पड़ा था। सीरियाई इंटेलीजेन्स इस प्रकार के अभियान में पूरी तरह दक्ष है।
- यह भी संभव है कि पूर्वी फ़ुरात के इलाक़े में मौजूद अमरीकी सैनिकों पर दाइश का हमला शुरू हो जाए जिसने बग़दादी के मारे जाने के बाद अपने बयानों में इंतेक़ाम लेने की बात कही है।
सीरिया के तेल के कुओं पर क़ब्ज़ा करना और उसके बारे में ट्रम्प जैसे बयान देना किसी राष्ट्राध्यक्ष का तरीक़ा नहीं बल्कि माफ़िया का अंदाज़ है। आज तो अमरीका सीरिया के तेल और गैस के कुओं पर क़ब्ज़ा कर रहा है और कल वह इराक़, लीबिया और सऊदी अरब के तेल के कुओं पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश करेगा। इसके लिए वह जास्टा क़ानून जैसे अनेक बहानों का प्रयोग कर सकता है।
बहरहाल हमें तो पूरा यक़ीन है कि सीरियाई सरकार जिसने अपने देश की 80 प्रतिशत से अधिक धरती आज़ाद करवाई है वह इन तेल और गैस के कुओं को भी वापस ज़रूर लेगी और शायद दैरुज़्ज़ूर में मिलने वाली हार दोबारा चुनाव जीतने की ट्रम्प की तमन्ना पर सबसे बड़ा आघात होगी। अलबत्ता यह तब होगा जब ट्रम्प चुनाव तक वाइट हाउस में बाक़ी रह सके।