अंतर्राष्ट्रीय साम्राज्य से मुक़ाबले के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर रविवार को हज़ारों छात्र और छात्राओं ने वरिष्ठ नेता आयुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई से मुलाक़ात की।
इस अवसर पर वरिष्ठ नेता ने अपने संबोधन में देशभर के छात्र, छात्राओं, और ऊर्जावान युवा पीढ़ी को ईरान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और मूल्यवान पूंजी क़रार दिया।
वरिष्ठ नेता ने ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध अमरीका की दुश्मनी के क्रम की ओर संकेत करते हुए कहा कि आज भेड़िया नुमा अमरीका यद्यपि कमज़ोर है लेकिन अधिक ख़ूंख़ार और ढीट हो गया है और इसके मुक़ाबले में ईरान ने अपनी रक्षा शक्ति में विस्तार करके और अमरीका से वार्ता के प्रस्ताव को रद्द करके देश में अमरीका के दोबारा प्रभाव का रास्ता बंद कर दिया है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अगस्त 1953 के सैन्य विद्रोह को महान ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध अमरीका की खुली दुश्मनी का आरंभिक बिन्दु क़रार दिया और कहा कि अमरीकियों ने अपने ऊपर विश्वास करने वाली मुसद्दिक़ की सरकार पर भी दया नहीं की और राष्ट्रीय सरकार को गिराने के बाद अपनी पिट्ठु, भ्रष्ट और तानाशाही सरकार को सत्ता में पहुंचा दिया और ईरानी जनता के विरुद्ध आख़िरी हद तक दुश्मनी की।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अमरीकियों सहित कुछ लोग इतिहास मेें फेरबदल करने और अमरीकी जासूसी के अड्डे पर क़ब्ज़े को ईरान के विरुद्ध अमरीका की दुश्मनी का आरंभिक बिन्दु क़रार देने का प्रयास कर रहे हैं जबकि अमरीकी शुरु ही से मैत्रीपूर्ण योजनओं की आड़ में ईरानी राष्ट्र से दुश्मनी कर रहे थे और अगस्त 1953 के विद्रोह द्वारा उनकी दुश्मनी सामने आ गयी और यह ईरान के विरुद्ध अमरीका की दुश्मनी का आरंभिक बिन्दु है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने इस वास्तविकता की ओर संकेत करते हुए कि अमरीकी नीतियों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, कहा कि इस्लामी क्रांति मूल रूप से अमरीका और उससे संबंधित सरकारों के विरुद्ध थी और सब लोगों ने इमाम ख़ुमैनी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार और पिट्ठु सरकार का बोरिया बिस्तरा बांध दिया और इस्लामी व्यवस्था स्थापित किया।
आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पिछले 41 वर्ष के दौरान अमरीका की ओर से अंजाम पाने वाली कुछ कार्यवाहियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस अविध के दौरान इस्लामी क्रांति के विरुद्ध जो कुछ उनके बस में था और उन्हें आता था वह उन्होंने अंजाम दिया, अलबत्ता हमने भी इसके मुक़ाबले में जो कर सकते थे, किया और बहुत से मामलों में उसे पराजित भी किया है।
वरिष्ठ नेता ने ईरान में अमरीका के राजनैतिक प्रभाव और वर्चस्व का रास्ता बंद कर दिए जाने को अमरीकी शासकों के षड्यंत्रों का बेहतरीन जवाब क़रार देते हुए कहा कि अमरीका के साथ वार्ता से इन्कार, ईरान में उसके दोबारा प्रभाव का रास्ता बंद करने के लिए महत्वपूर्ण साधन है।
वरिष्ठ नेता ने ईरान की ओर से अमरीका के विरोध को मज़बूत तर्क पर आधारित नीति क़रार दिया और कहा कि यह विवेकपूर्ण रवैया अमरीका के दोबारा प्रभाव का रास्ता बंद कर देगा, ईरान की वास्तविक शक्ति को दुनिया के सामने सिद्ध कर देगा और सामने वाले पक्ष के झूठे रोब और दबदबे को मिट्टी में मिला देगा।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अमरीका की साम्राज्यवादी हरकतों की ओर संकेत करते हुए कहा कि अमरीका जो दुनिया भर के शासकों के साथ वार्ता करके उन पर एहसान जताता है, वर्षों से ईरानी अधिकारियों के साथ वार्ता के लिए व्याकुल है किन्तु ईरान इससे इनकार कर रहा है और यह बात ईरानी राष्ट्र के दुश्मनों के लिए अहसनीय है क्योंकि इससे सिद्ध होता है कि दुनिया में एक ऐसी सरकार भी है जो अमरीका की अतिग्रहणकारी शक्ति और अंतर्राष्ट्रीय तानाशाही को स्वीकार नहीं करती।
वरिष्ठ नेता ने अमरीका के साथ वार्ता को परिणामहीन क़रार देते हुए कहा कि जो लोग अमरीका के साथ वार्ता को समस्त समस्याओं का हल समझते हैं वह बहुत बड़ी भूल में हैं, अमरीका के साथा वार्ता का कोई परिणाम नहीं निकलेगा क्योंकि वह निश्चित रूप से ईरान को विशिष्टता देने के लिए तैयार नहीं होगा।