1 नवंबर 2019 - 16:03
इराक़ में प्रदर्शनकारियों को मिला व्यापक समर्थन, लेकिन प्रदर्शनों को हाइजैक करने के प्रति जारी की गई चेतावनी

इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्लाह सैय्यद अली सीस्तानी के कार्यालय ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए हिंस चेतावनी

ता में ही देखता है। मा रचे असद ने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर वह तुर्की चली जायेंती करते चल और अराजकता फैलाने वालों को चेतावनी दी है।

दूसरी ओर इराक़ी राष्ट्रपति बरहम सालेह ने टीवी पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन प्रदर्शनकारियों और इराक़ी जनता की मांगों पर सहमति जताते हुए बल देकर कहा है कि जो भी समस्याएं हैं, उन्हें सिर्फ़ क़ानून के दायरे में ही हल किया जा सकता है।

पवित्र शहर कर्बला में इराक़ के वरिष्ठ धर्मगुरु के प्रतिनिधि अहमद साफ़ी का कहना था कि आयतुल्लाह सीस्तानी ने प्रदर्शनों के दौरान निर्दोष लोगों की जानें जाने पर गहरा दुख जताया है और चेतावनी देते हुए कहा है कि इस रक्तपात और हिंसा पर तुरंत लगाम लगनी चाहिए।

आयतुल्लाह सीस्तानी के कार्यालय से जारी होने वाले बयान में प्रदर्शनकारियों से अपील की गई है कि वे प्रदर्शनों के दौरान वरिष्ठ धर्मगुरु की तस्वीरों का इस्तेमाल नहीं करें। बग़दाद में प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने हाथों में वरिष्ठ धर्मगुरु की तस्वीरें उठा रखी थीं।

इस बीच, इराक़ी राष्ट्रपति ने प्रदर्शनकारियों के देश में सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक सुधारों को जायज़ ठहराते हुए उन्हें पूरा करने वादा किया है। इसी के साथ उन्होंने इस बात पर भी बल दिया है कि इन मांगों को क़ानून के दायरे में ही रहकर पूरा किया जा सकता है। राष्ट्रपति सालेह ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की हिंसा की निंदा करते हुए सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों को एक दूसरे का सहयोगी और दोस्त बताया। उनका कहना था कि हम सभी को मिलकर सुरक्षा बलों का समर्थन करना चाहिए और उनके हाथ मज़बूत करने चाहिएं, ताकि वह शांति व्यवस्था की स्थापना कर सकें, जो हमारी सबसे बुनियादी ज़रूरतों में से एक है।

देश में चुनाव से संबंधित क़ानूनों में सुधार की प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करते हुए इराक़ी राष्ट्रपति ने घोषणा की है कि राष्ट्रपति कार्यालय ने इन क़ानूनों की समीक्षा शुरू कर दी है और जल्दी ही सम्प्रदायों के आधार पर बनने वाले क़ानूनों में सुधार किया जाएगा।

ग़ौरतलब है कि इराक़ी जनता बड़े पैमाने पर देश में भ्रष्टाचार, मूल सुविधाओं के अभाव और संविधान में सुधार जैसी मांगों को लेकर सड़कों पर है। इराक़ के क़रीब समस्त राजनीतिक दलों और वरिष्ठ धर्मगुरुओं ने जनता की इन मांगों के समर्थन का एलान किया है, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि इराक़ की दुश्मन शक्तियां जन प्रदर्शनों को हाइजैक करके देश में एक बार फिर हिंसा और रक्तापात फैलाना चाहती हैं, जैसा कि प्रदर्शनों के दौरान देखा गया है, इसलिए सरकार और जनता दोनों को बहुत ही समझदारी से काम लेना चाहिए और राष्ट्र के दुश्मनों की साज़िशों पर पानी फेर देना चाहिए।