इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू ने कहा है कि ईरान ने सटीक निशाना लगाने वाले अपने मिसाइल अरब क्षेत्रों में फैलाना आरंभ कर दिये हैं और इन सारे मिसाइलों का मक़सद, इस्राईल को निशाना बनाना है। नेतेन्याहू ने यह बयान, अमरीकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात के बाद दिया है।
हालिया महीनों में ईरान और इस्राईल के बीच तनाव में वृद्धि हुई है यहां तक कि इस्राईली सेना के विशेषज्ञों को लगता है कि जिन मोर्चों पर इस्राईल को जवाब देना है उनमें आपस मे कोई तालमेल नहीं है।
इस्राईली सेना को लगता है कि उत्तरी मोर्चे पर अगर युद्ध भड़का तो उसकी आगे दक्षिणी मोर्चे पर भी पहुंच जाएगी और उसके साथ ही इस्राईल के खिलाफ कई दूसरे मोर्चे भी खुल सकते हैं और यह चीज़ इस्राईल के लिए चिंताजनक है लेकिन उससे अधिक इस्राईल के लिए चिंता की बात कुछ और है। वाशिंग्टन एक्ज़ामिनर में मार्क डेबोविट्स ने यह सवाल उठाया है कि अगर सऊदी अरब के आरामको कंपनी के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले की ही तरह इस्राईल के डिमोना परमाणु प्रतिष्ठान पर हमले की योजना हो तो क्या होगा? यह बेहद आसान लक्ष्य है।
पिछले महीने ही इस्राईल के डिमोना परमाणु प्रतिष्ठान के एक संस्थापक और वैज्ञानिक औज़ी एफन ने इस्राईल के हारित्ज़ समाचार पत्र में एक लेख में इस खतरे की ओर से चेतावनी दी थी । उनके लेख का शीर्षक था कि " सऊदी अरब पर ईरान के हमले से यह सिद्ध होता है कि क्यों इस्राईल को अपने परमाणु कारखाने बंद कर देना चाहिए" इसके साथ ही उन्होंने लिखा था कि ईरान के पास आधुनिक व विकसित तकनीक है और ईरानी, बड़े पैमाने पर ड्रोन विमान और क्रूज मिसाइल बनाने और उन्हें उड़ाने की क्षमता रखते हैं और इस्राईल को यह स्वीकार करना चाहिए कि उसे हमले का खतरा है इसी लिए उसे डिमोना परमाणु प्रतिष्ठान को पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। ईरानियों ने हमें दिखा दिया है कि हमारा डिमोना परमाणु प्रतिष्ठान किस तरह से असहाय और असुरक्षित है। " इन हालात में यह एसा लग रहा है कि मध्य पूर्व में एक और चेर्नोबिल त्रासदी हो सकती है।(Q.A.) साभार, रायुल यौम, लेखक विचारों से सहमत होना आवश्यक नहीं