29 अक्टूबर 2019 - 14:49
इस्राईल को हो चला है ख़तरे का एहसास, जनता से विश्वास की भीख मांग रहे हैं नेतनयाहू, चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ को डर है कि एक साथ कई म

इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू फ़ेक न्यूज़ फैलाने के मास्टर समझे जाते हैं। वह अपने व्यक्तिगत और राजनैतिक स्वार्थ के लिए ख़ुद भी और अपने क़रीबी लोगों के माध्यम से भी झूठी ख़बरें बड़ी आसानी से फैलाते हैं।

कभी कभी वह इस्राईल के हेब्रू भाषा के अख़बारों में झूठी ख़बरें उच्च पदस्थ सूत्रों के माध्यम से फैलाते हैं। लेकिन आजकल वह आरोप लगा रहे हैं कि इस्राईली मीडिया उनका दुशमन हो गया है और उन्हें किसी भी क़ीमत पर प्रधानमंत्री पद से दूर कर देना चाहता है।

मआरीव अख़बार में एक सीनियर टीकाकार बिन कास्बीत ने लिखा कि नेतनयाहू अपने आंतरिक मामलों में बुरी तरह उलझ गए हैं जबकि राजनैतिक व सुरक्षा कैबिनेट कमेटी का कामकाज भी ठप्प हो गया है। जब इस कमेटी की बैठकें होती हैं तो उसमें भी बड़ी बचकाना बातें की जाती हैं।

नौबत यह आ गई है कि यह बात खुले आम होने लगी है कि इस्राईल के राजनैतिक मंच पर अब बिनयामिन नेतनयाहू के दिन पूरे हो चुके हैं। कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि नेतनयाहू की आज वही हालत हो गई है जो सीरिया संकट की शुरुआत के समय बश्शार असद की थी। नेतनयाहू जिन्हें कभी इस्राईल में जादूगर कहा जाता था अब आम जनता से विश्वास की भीख मांग रहे हैं। वह कह रहे हैं कि मेरी इस बात पर सब विश्वास करें कि मध्यपूर्व में जो घटनाएं हो रही हैं उनकी गति बहुत तेज़ है और सब कुछ इस्राईल के ख़िलाफ़ जा रहा है। इसलिए इस्राईल के लिए ज़रूरी हो गया है कि समय हाथ से निकल जाने से पहले खुद को पूरी तरह तैयार कर ले। नेतनयाहू यह बयान देते समय आम जनता से अपील करते हैं कि उनकी बात पर यक़ीन किया जाए क्योंकि वह झूठ नहीं बोल रहे हैं और न ही फ़ेक न्यूज़ फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

कास्बीत का कहना है कि चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ उवीव कूख़ाफ़ी भी बयान देने पर मजबूर हो गए। उन्होंने भी कहा कि सुरक्षा जानकारियों से यही लगता है कि बड़े ख़तरे इस्राईल की घात में बैठे हैं और यह बात साफ़ हो चुकी है कि अगर इस्राईल ने ईरान के इनफ़्रास्ट्रक्चर पर हमला किया तो ईरान बड़ा ज़ोरदार जवाब देगा और यह सब उस समय होगा जब इस्राईल के पास मज़बूत सरकार भी नहीं है और न राजनैतिक सुरक्षा कैबिनेट कमेटी है। सेना के पास कोई सालाना रोडमैप नहीं है और सेना के बजट का रास्ता भी साफ़ नहीं है।

टीकाकार यह मानते हैं कि कूख़ाफ़ी ने बहुत बड़ा जोखिम लेकर बयान दिया है क्योंकि राजनैतिक मंच पर उन्हें शून्य नज़र आ रहा है। उन्हें यह महसूस हो रहा है कि कभी भी इस्राईल के ख़िलाफ़ एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध शुरू हो सकता है क्योंकि इस समय जो शांति नज़र आ रही है वह तूफ़ान से पहले की शांति है। कूख़ाफ़ी की चेतावनी से यह समझा जा सकता है कि कोई भी बड़ी लड़ाई अचानक शुरू हो जाएगी और देखते ही देखते व्यापक युद्ध में बदल जाएगी। हालांकि इससे पहले तक जो जानकारियां थीं उनसे यह नहीं लगता था कि इस्राईल के ख़िलाफ़ बने अलग अलग मोर्चे आपस में जुड़े हुए हैं। यानी पहले यह नहीं लगता था कि हमास से युद्ध शुरू होगा तो ठीक उसी समय हिज़्बुल्लाह से भी लड़ाई छिड़ जाएगी।

अब जो जानकारियां हैं उनके अनुसार इस्राईली सेना को एक साथ कई मोर्चों पर लड़ाई की तैयारी करनी होगी। हमास से युद्ध शुरू होते ही हिज़्बुल्लाह ही के साथ नहीं बल्कि सीरिया और ईरान के साथ भी लड़ाई शुरू हो जाएगी।

बिन कास्बीत का कहना है कि इस्राईली सेना ने तो अपना काम पूरी मेहनत और तनमयता से किया है लेकिन यह सच्चाई है कि अमरीका मध्यपूर्व से निकलता जा रहा है और ईरान की ताक़त लगातार बढ़ती जा रही है। हिज़्बुल्लाह और हमास के बीच सहयोग अब इस स्थिति में पहुंच गया है कि वह हर इस्राईली को भूमिगत शरण स्थलों में छिपने पर मजबूर कर सकते हैं।

अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के इलाक़े नासेरा से ज़ोहेर एंद्रावोस की रिपोर्ट