दुनिया के सबसे ख़तरनाक आतंकी संगठनों में से एक दाइश (आईएसआईएस) के सरग़ना अबू बक्र अलबग़दादी के मारे जाने की ख़बर सुनते ही इराक़, सीरिया, यमन और अन्य देशों में उसके जघन्य अपराधों की याद ताज़ा हो जाती है। सन 2014 में इराक़ के मूसिल प्रांत पर दाइश का क़ब्ज़ा होने के साथ ही उसकी पाश्विकता भी शुरू हो गई। इस तकफ़ीरी आतंकी गुट ने उसी समय तिकरीत में स्पाइकर एयर बेस में वायु सेना के केडिट काॅलेज के हज़ारों छात्रों के जनसंहार, सार्वजनिक रूप से गर्दन उड़ानें और शवों को दजला में बहाने या फिर सामूहिक क़ब्रों के चित्र जारी करने शुरू कर दिए थे।

सीरिया के दैरुज़्ज़ूर क्षेत्र के क़रीब शईतात क़बीले में किए गए 15 जनसंहार उन भयानक अपराधों में से थे जो दाइश के तकफ़ीरी आतंकियों ने किए थे और इस क़बीले के सैकड़ों युवाओं को खुले मैदान में ले जा कर उन्हें सार्वजनिक रूप से मार डाला था। दाइश ने इसी तरह मूसिल शहर पर क़ब्ज़ा करने के तुरंत बाद वहां के ईसाइयों की संपत्ति और उपासना स्थलों को अपने नियंत्रण में ले लिया और लगभग चार हज़ार ईसाई परिवारों को मूसिल से भगा दिया। मूसिल के ईसाइयों के बाद ईज़दी समुदाय की बारी आई और उन्हें सिंजार के पहाड़ की ओर भगा दिया गया लेकिन उनकी युवतियों और लड़कियों को बेचने के लिए नैनवा की बाज़ारों में पहुंचा दिया गया। ईज़दी महिलाओं ने अपने उत्पीड़न की जो घटनाएं बयान की हैं उन्हें सुन कर रौंगटे खड़े हो जाते हैं।

इस तकफ़ीरी आतंकी गुट ने इराक़ की असंख्य महिलाओं का यौन शोषण और सार्वजनिक बलात्कार किया जबकि 13 साल से कम के हज़ारों बच्चों को आतंकी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया। इसके साथ ही इस ख़तरनाक आतंकी गुट ने लोगों को यातनाएं देने और उनकी हत्या करने के ऐसे ऐसे तरीक़े अपनाए जिनका मानव इतिहास में कोई उदाहरण नहीं मिलता। सिर काटना इस गुट के आतंकियों द्वारा हत्या का सबसे प्रचलित तरीक़ा था और अनेक वीडियो फ़िल्मों में इन आतंकियों का नारा भी यही था कि हम सिर काटने के लिए आए हैं।

ज़िंदा जलाना, हत्या के उन तरीक़ों में से है जिनमें दाइश के आतंकियों को विशेष दक्षता प्राप्त थी। इस संबंध में सबसे ज़्यादा मशहूर वीडियो, जाॅर्डन के एक पायलट को जलाना था जिनका नाम मआज़ अलकसासबा था। उनका विमान दिसम्बर 2014 में सीरिया में गिर गया था और उन्हें दाइश ने पकड़ लिया था। इसके बाद उन्हें लोहे के एक पिंजरे में बंद करके आग लगा दी गई थी। दाइश ने इसी तरह एज़ाम ईद नामक एक सीरियाई पायलट को भी पकड़ कर जला दिया था और उन्हें जलाने की पूरी फ़िल्म बनाई थी जो 58 मिनट की थी।

इसके अलावा राॅकेट से जान लेने का तरीक़ा भी दाशइ ने दुनिया को सिखाया। इस प्रकार से कि क़ैदियों को एक गाड़ी में बिठाया गया और फिर उस गाड़ी को राॅकेट से उड़ा दिया। इसी तरह अनेक बंदियों की गर्दनों को विस्फोट तार से बांध कर उन्हें मारना भी दाइश की ही तैयार की गई नई शैली थी जिसमें विस्फोट होते ही क़ैदियों की गर्दनें एक साथ उड़ जाती थीं। अपने दुश्मनों को डराने के लिए लोगों को डुबा कर मारना भी इसी तकफ़ीरी आतंकी गुट की तैयार की गई शैली थी। इसमें क़ैदियों को एक लोहे के पिंजरे में बंद कर दिया जाता था और फिर उस पिंजरे को क्रेन के माध्यम से तालाब या स्वीमिंग पूल में डाल दिया जाता था।

दाइश के आतंकियों ने सिर्फ़ लोगों की जान और इज़्ज़त के साथ ही ख़िलवाड़ नहीं किया बल्कि उनकी धार्मिक मान्यताओं को भी पैरों तले रौंद दिया। ईसाइयों के अनेक चर्चों को ध्वस्त किया गया। अनेक मस्जिदों को इस गुट ने तबाह किया और कई पैग़म्बरों के मज़ारों को भी ध्वस्त कर दिया। सीरिया के पालमीरा शहर में इस तकफ़ीरी आतंकी गुट ने एक अत्यंत प्राचीन एम्फ़ी थियेटर को भी तबाह कर दिया। मानवीय आधारों पर इराक़ में चिकित्सा सेवाओं प्रदान करने वाली भारत की दसियों नर्सों का जनसंहार भी इस अमानीय गुट के निंदनीय कृत्यों में शामिल है।