29 अक्टूबर 2019 - 13:58
नेतानयाहू ने फिर ईरानोफ़ोबिया का सहारा लेनी की कोशिश की, कोई भी देश ईरान के मीज़ाइल हमलों का मुक़ाबला करने की क्षमता नहीं रखताः

ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री ने मंगलवार को दावा किया है कि ईरान, मध्यपूर्व के किसी भी स्थान को लक्ष्य बनाने की क्षमता रखने वाला क्रूज़ मीज़ाइल बनाने की कोशिश कर रहा है।

बेनयामिन नेतनयाहू ने कहा है कि उनके पास जो रिपोर्टें हैं वे बताती हैं कि तेहरान यमन समेत क्षेत्र के अनेक स्थानों पर इस प्रकार के मीज़ाइल स्थापित करना चाहता है ताकि इस्राईल समेत कुछ लक्ष्यों को निशाना बना सके। उन्होंने कहाकि ईरान को आशा है कि वह इराक़, सीरिया, लेबनान व यमन को अत्यंत सूक्ष्मता से मार करने वाले मीज़ाइलों से इस्राईल को निशाना बनाने के लिए अड्डों के रूप में इस्तेमाल कर सके और यह एक बहुत बड़ा ख़तरा है।

 

नेतनयाहू ने इससे पहले, अमरीका के वित्तमंत्री स्टीवन मनुचिन और वाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार जेरड कूश्नर से अपनी मुलाक़ात से पहले पत्रकारों से बात करते हुए ईरान के बारे में इसी प्रकार की चिंताओं को दोहराया था और कहा था कि ईरान कोशिश कर रहा है कि लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के मीज़ाइलों के भंडार में गाइडेड मीज़ाइल सिस्टम स्थापित कर दे। पिछले कुछ दिनों में नेतनयाहू के अलावा ज़ायोनी शासन के कई सैन्य टीकाकारों और संचार माध्यमों ने भी इस्राईल के ख़िलाफ़ ईरान के मीज़ाइल ख़तरे और क्षेत्र में शक्ति का संतुलन ईरान के पक्ष में मुड़ने की बात कही है।

 

जेरुसलम पोस्ट ने मंगलवार को इन ख़तरों के संबंध में ज़ायोनी शासन के अधिकारियों की चिंता को बढ़ा चढ़ा कर पेश करते हुए लिखा कि इस्राईल को एक ईरानी तूफ़ान का सामना है जो इस्राईली सीमाओं के निकट पहुंच रहा है। एक ज़ायोनी जनरल येत्सहाक़ बेरीक ने  भी सोमवार को ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ ईरान के ख़तरों की समीक्षा करते हुए अपने एक लेख में लिखा कि हिज़्बुल्लाह के पास विभिन्न प्रकार के लगभग एक लाख तीस हज़ार मीज़ाइल हैं जिनमें से दस हज़ार से ज़्यादा लम्बी दूरी के और सटीक निशाना लगाने वाले हैं। उन्होंने लिखा कि कोई भी देश ईरान के व्यापक मीज़ाइल हमलों का मुक़ाबला करने की क्षमता नहीं रखता।

 

इस्राईली समाचारपत्र ह्यूम ने भी लिखा है कि ऐसी स्थिति में जब इस्राईल को विभिन्न स्थानों से मीज़ाइल हमलों की ज़द में है, संभव है कि क्रूज़ मीज़ाइल हर दिशा से इस्राईल पर आ गिरें। ऐसा लगता है कि इस्राईली अधिकारियों और मीडिया ने ईरान की मीज़ाइल शक्ति को केंद्र बना कर ईरानोफ़ोबिया का जो राग अलापना शुरू किया है उसके कई कारण हो सकते हैं।

  1. नेतनयाहू को आंतरिक संकट का सामना है और अगर वे राजनैतिक मंच से हटते हैं तो उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का केस चलने और उनके जेल जाने की संभावना है। यही कारण है कि वे ईरानोफ़ोबिया का सहारा लेकन ज़ायोनी समाज को यह समझाना चाहते हैं कि सिर्फ़ वही ईरान के ख़तरे को रोक सकते हैं।
  2. नेतनयाहू ईरानोफ़ोबिया का सहारा लेकर अरबों व इस्राईल की दुश्मनी को अरबों व ईरान की दुश्मनी में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
  3. ज़ायोनी अधिकारियों व मीडिया के दावे ऐसे समय में सामने आ रहे हैं जब अमरीकी वित्त मंत्री अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन का दौरा करने वाले हैं, अतः यह नतीजा निकाला जा सकता है कि नेतनयाहू, अमरीका पर इस बात के लिए दबाव डालना चाहते हैं कि वह ईरान पर अधिकतम दबाव बनाए रखे।
  4. इस तरह की अफ़वाहें भी सामने आ रही हैं कि अमरीका क्षेत्र से निकलने की तैयारी कर रहा है। नेतनयाहू ईरानोफ़ोबिया का राग अलाप कर, क्षेत्र में अमरीका की उपस्थिति को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इस्राईल की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।