सूरए ताहा की आयत क्रमांक 1 और 2 का अनुवादः
ईश्वर के नाम से जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है। हमने क़ुरआन को आप पर इस लिए नहीं उतारा है कि आप (स्वयं को) कठिनाई में डालें।
संक्षिप्त टिप्पणी:
इसी प्रकार वे ईश्वरीय आयतों के प्रचार और उन्हें लोगों तक पहुंचाने हेतु लोगों के मार्गदर्शन की लालसा में स्वयं को इतनी कठिनाई में डालते थे कि इस आयत और कुछ अन्य आयतों ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि वे स्वयं को इतना अधिक कठिनाई में क्यों डालते हैं?
इन आयतों से मिलने वाले पाठ:
- ईश्वर नहीं चाहता कि उसके बंदे धार्मिक कर्तव्यों के पालन में बहुत अधिक कठिनाई में पड़ें।
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क़ुरआने मजीद लोगों के जीवन के मामलों को कठिनाई में डालने के लिए नहीं आया है बल्कि हर व्यक्ति का दायित्व उसकी क्षमता व शक्ति भर है, उससे अधिक नहीं।