तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी करके कहा है कि तुर्क सेना ने उत्तरी सीरिया के 181 क्षेत्रों को अपने हमलों का लक्ष्य बनाया है। सीरिया में मानवाधिकार के लिए काम करने वाले एक संगठन का कहना है कि तुर्की के हमलों में अब तक 15 व्यक्ति हताहत और 41 घायल हुए हैं। संगठन ने गुरुवार को बताया कि मरने वालों में तीन बच्चों और एक महिला समेत 8 आम नागरिक हैं जबकि कुर्द संगठन वाईपीजी के सात सदस्य भी तुर्की की बमबारी में मारे गए हैं। इस मानवाधिकार संगठन का कहना है कि तुर्की के हमलों में 13 आम नागरिक और 28 कुर्द लड़ाके घायल हुए हैं।
इस बीच दुनिया भर में तुर्की के इस सैन्य हमले की निंदा की जा रही है। जर्मीन के विदेश मंत्री हाइको मास ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए अन्कारा से मांग की है कि वह तुरंत अपने सैन्य अभियान को रोक दे। फ़्रान्स ने भी इस हमले की निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाए जाने की मांग की है। ब्रिटेन ने भी इस हमले की समीक्षा के लिए सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने पर बल दिया है। रूस के संसद सभापति वियाचेसलाव वोलोदिन ने भी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं विशेष कर सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वह सीरिया व तुर्की की सीमा पर जारी तनाव को समाप्त कराने के लिए बैठक बुलाए।
इटली के प्रधानमंत्री जोज़पे कोन्टे ने भी कहा है कि तुर्की के इस हमले से असैनिकों को क्षति पहुंचेगी और क्षेत्र में अस्थिरता पैदा होगी। हालैंड ने इस हमले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इस देश में तुर्की के राजदूत को तलब किया है। मिस्रा ने भी उत्तरी सीरिया में तुर्की के सैन्य अभियान की समीक्षा के लिए सुरक्षा परिषद और अरब लीग की आपात बैठक बुलाए जाने की मांग की है। यूरोपीय संघ ने एक बयान जारी करके तुर्की से मांग की है कि वह सीरिया में अपनी एकपक्षीय सैन्य कार्यवाही बंद करे। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव अंटोनियो गुटेरस ने भी एक बयान जारी करके तुर्की से कहा है कि वह सीरिया की अखंडता का सम्मान करे। लेबनान के विदेश मंत्रालय ने भी तुर्की के कार्यवाही की निंदा करते हुए इसे एक अरब देश पर सीधा सैन्य हमला बताया है। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने भी कहा है कि वह सीरिया की धरती पर किसी भी प्रकार के हमले का विरोधी है।