10 अक्टूबर 2019 - 13:11
कुर्दों के बाद अब अरबों और इस्राईलियों से भी पल्ला झाड़ रहे हैं ट्रम्प, क्या आरामको हमले से ट्रम्प ने इस फ़ैसले में जल्दी की? इस

अरब जगत के मशहूर टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ाः अमरीका ने पहले तो सीरिया में कुर्द फ़ोर्सेज़ का गठन करके उन्हें अपने सैनिक मिशन में प्रयोग किया और अब तुर्की ने हमला शुरू किया है तो वह कुर्दों को छोड़कर किनारे हो गया है। इसके बाद अब ट्रम्प ने ज़्यादा ज़ोरदार थप्पड़ अपने अरब घटकों और शायद इस्राईलियों को भी जड़ दिया है।

ट्रम्प ने बुधवार को अपने एक चौंका देने वाले ट्वीट में लिखा कि मध्यपूर्व में हस्तक्षेप अमरीका के इतिहास का सबसे बुरा फ़ैसला था। हम अपने प्यारे सैनिकों को धीरे धीरे सुरक्षित रूप में वतन वापस ला रहे हैं। मध्यपूर्व की लड़ाइयों ने अमरीकी ख़ज़ाने को आठ ट्रिलियन डालर का नुक़सान पहुंचाया है।

अमरीकी सपोर्ट पर भरोसा करने वाली अरब सरकारों के लिए इस वाक्य का क्या मतलब है जिन्होंने ट्रम्प को ख़ुश करने के लिए कई सौ अरब डालर ख़र्च कर दिए और रियाज़ यात्रा में उनके लिए रेड कारपेट बिछाया? हम यहां विशेष रूप से सऊदी अरब और इमारात की बात कर रहे हैं।

पैग़ाम साफ़ है, इसमें कुछ विवरण देने की ज़रूरत नहीं है। अमरीका का पैग़ाम यह है कि ईरान के पास जाओ, सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का फ़ोन नंबर मालूम करो या राष्ट्रपति रूहानी या फिर विदेश मंत्री ज़रीफ़ का फ़ोन नंबर पता करके उनसे बात करो और समझौता करके यमन युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता खोजो। हमसे किसी चीज़ की उम्मीद न रखो हम बस हमदर्दी के दो चार शब्द बोल देंगे इसके अलावा कुछ नहीं करेंगे।

ट्रम्प ने कुर्दों को जिस तरह धोखा दिया है वही चीज़ वह कुछ सरकारों के साथ भी कर सकते हैं, इस सच्चाई को अमरीका के घटकों में सबसे पहले इस्राईलियों ने समझा है और वहां शोक छा गया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राईल के पूर्व राजदूत डौरी गोल्ड ने कहा कि मैं आज ख़ुद को एक कुर्द महसूस कर रहा हूं,  जब अमरीकियों ने कुर्दों को अकेला छोड़ दिया तो हमें भी अकेला क्यों नहीं छोड़ सकते? गोल्ड अमरीका को भी अच्छी तरह समझते हैं और इस्राईल के अरब घटकों को भी अच्छी तरह जानते हैं। वह सऊदी अरब के पूर्व इंटैलीजेन्स चीफ़ तुर्की फ़ैसल इसी तरह पूर्व जनरल अनवर इश्क़ी से कई बार मुलाक़ातें कर चुके हैं। इस्राईलियों में इस समय यह विचार आम हो चुका है कि ट्रम्प ने मध्यपूर्व के इलाक़े से राजनैतिक और सामरिक रूप से पूरी तरह बाहर निकल जाने का फ़ैसला कर लिया है और अनाथ बन चुके अपने घटकों को उनके हाल पर छोड़ने जा रहे हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के इस फ़ैसले के कुछ कारण हैं।

पहला कारण यह है कि अमरीका के पास अब तेल बहुत अधिक हो गया है वह तेल का निर्यात भी करने लगा है अतः उसे मध्यपूर्व के तेल की ज़रूरत नहीं है।

दूसरा कारण यह है कि ईरान के नेतृत्व में बनने वाले इस्लामी प्रतिरोधक मोर्चे की ताक़त बहुत बढ़ चुकी है और चीन की आर्थिक व सामरिक शक्ति में लगातार वृद्धि हो रही है। कुछ ही वर्षों में डालर का प्रभुत्व समाप्त होने वाला है।

तीसरा कारण यह है कि अमरीका ने सऊदी अरब और इस्राईल की रक्षा के लिए जो मिसाइल ढाल व्यवस्था स्थापित कर रखी थी वह पूरी तरह फ़ेल हो गई है। बक़ैक़ और ख़रैस में आरामको के तेल प्रतिष्ठानों पर होने वाले हमलों से इस सिस्टम की नाकामी पूरी तरह खुलकर सामने आ गई हैं। दूसरी ओर ईरान ने हुरमुज़ के इलाक़े में अमरीकी ड्रोन को मार गिराया।

चौथा कारण यह है कि अमरीकी प्रतिबंध ईरान, चीन, रूस और वेनेज़ोएला को झुका नहीं पाए बल्कि इन देशों ने एक संयुक्त गठजोड़ बना लिया है जिसमें दूसरे देश भी शामिल हो सकते हैं।

पांचवां कारण यह है कि ट्रम्प ने 2015 के चुनावी कैंपेन में कहा था कि मध्यपूर्व से वह सारे अमरीकी सैनिकों को अमरीका वापस लाएंगे। उन्होंने इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान युद्ध का विरोध किया मगर उन्होंने अरब देशों से सैकड़ों अरब डालर वसूलने के लिए अपना फ़ैसला टाल दिया था। लेकिन अब हालत यह है कि अरब सरकारों के ख़ज़ाने ख़ाली हो गए हैं।

अमरीका ने यह फ़ैसला जल्दी में इसलिए किया कि उसे सऊदी अरब के भीतर आरामको के तेल प्रतिष्ठानों पर होने वाले हमले ने डरा दिया। यह बात अमरीकी और इस्राईली दोनों ही मान रहे हैं कि यह हमला जिसने किया है वह हक़ीक़त में असाधारण दक्षता और कौशल रखने वाले लोग हैं।

बीस मिसाइल और ड्रोन विमान कई सौ किलोमीटर दूर से चलकर अपने लक्ष्य को बड़े सटीक रूप से ध्वस्त कर देते हैं, यह देखकर इस्राईली बुरी तरह डर गए हैं क्योंकि उन्हें अच्छी तरह पता है कि अमरीकी मिसाइल ढाल व्यवस्था पैट्रियट और राडार तैनात होने के बावजूद जब यह मिसाइल और ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंच गए तो इस्राईल के डिमोना परमाणु केन्द्र तक क्यों नहीं पहुंच सकते।

अब तो हिज़्बुल्लाह को डेढ़ लाख मिसाइलों की भी ज़रूरत नहीं है वह कुछ दर्जन मिसाइलों की मदद से इस्राईल के सारे हवाई अड्डों, रेल स्टेशनों, बिजली के केन्द्रों, जल प्रतिष्ठानों, कारखानों अमोनिया के भंडारों और नक़्ब मरुस्थल में डिमोना परमाणु केन्द्र को निशाना बना सकता है।

हम एक बार फिर यह बात कह रहे हैं कि आने वाले दिनों और हफ़्तों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का फ़ोन बहुत व्यस्त रहेगा। मध्यपूर्व के बहुत से शासक उनकी हमदर्दी हासिल करने के लिए लाइन में लगे रहेंगे। इनमें नेतनयाहू हरगिज़ नहीं होंगे क्योंकि तेहरान में कोई भी उनका फ़ोन रिसीव करने वाला नहीं है। बल्कि शायद उनका जवाब मिसाइलों से दिया जाए।