अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यूक्रेट गेट में हाथ पैर मार रहे हैं जिसकी वजह से उनके खिलाफ पहली बार महाभियोग की तलवार लटक रही है, इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू को चुनाव में झटके बाद अब भ्रष्टाचार के तीन मामलों का सामना अदालत में करना है जब बिन सलमान खाशुकजी की हत्या की ज़िम्मेदारी लेने के बाद अपने पिता के बॉडी गार्ड की हत्या के दलदल में फंस चुके हैं।
इस्राईली मीडिया का कहना है जैसा कि पूर्वी मामलों के विशेषज्ञ " सेफी बारईल" ने लिखा है कि इसके विपरीत, ईरानी नेतृत्व बेहद मज़बूत पोज़ीशन में है हालांकि उस के खिलाफ अमरीका ने कड़े आर्थिक प्रतिबंध भी लगा रखे हैं। पिछले महीने सऊदी तेल कंपनी आरामको पर हमले का न तो अमरीका कोई जवाब दे पाया है और न ही सऊदी अरब ने कोई कार्यवाही की है बल्कि रियाज़ ने पहली बार संकेत दिये हैं कि वह तेहरान के साथ वार्ता पर तैयार है। आरामको पर हमले के कुछ ही दिन बाद ईरान के राष्ट्रपति रूहानी जनरल एसेंबली में सालाना अधिवेशन में भाग लेने के लिए न्यूयार्क गये जहां उनका व्यापक और अभूतपूर्व रूप से स्वागत किया गया और " पॉलितिको" पत्रिका ने तो पिछले हफ्ते यह भी लिखा कि फ्रांस की मदद से रूहानी और ट्रम्प के मध्य एक चार सूत्रीय समझौते पर सहमति भी बन गयी गयी थी और दोनों के मध्य भेंट होने भी वाली थी किंतु रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प ने नहीं बल्कि रूहानी ने अंतिम क्षणों में ट्रम्प से मिलने से इन्कार कर दिया।
ईरान की इन सब राजनीतिक विजय के साथ ही इस्राईली टीवी के चैनल-12 की राजनीतिक मामले की विश्लेषक " दाना फायस" ने इस्राईल पर किसी भी प्रकार के ड्रोन और मिसाइल हमले से सुरक्षित रहने के लिए एकता सरकार के गठन की ज़रूरत पर ज़ोर दिये जाने की ओर संकेत किया है।
उन्होंने इस्राईल के चैनल-12 पर अपने एक विश्लेषण में तेल अबीब के वरिष्ठ सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा है कि " नेतेन्याहू सरकार गठन के लिए इस्राईल की सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर बल दे रहे हैं और इस मामले में वह अकेले इस्राईली नेता नहीं है। वास्तव में इस्राईली नेताओं की ओर से इस्राईल की सुरक्षा को मज़बूत बनाए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर इस लिए है क्योंकि उन्हें ईरान की ओर से किसी बड़े हमले का डर सता रहा है और यह डर, ईरान की ओर से कई देशों के जहाज़ों पर हमले, अमरीकी ड्रोन विमान को मार गिराने और सऊदी अरब के आरामको तेल प्रतिष्ठान पर धावा बोले जाने के बाद बढ़ गया है और उनके कथनानुसार यह सब कुछ विश्व समुदाय की चुप्पी के दौरान हो रहा है। "
इस्राईली टीकाकार " दाना फायस" का कहना है कि इस्राईली अधिकारियों को यह लगता है कि ईरान की हिम्मत इतनी बढ़ चुकी है कि वह बड़े स्तर पर इस्राईल के खिलाफ कार्यवाही कर सकता है और इसके लिए वह ड्रोन विमानों का प्रयोग कर सकता है।
इस्राईल के चैनल-12 के अन्य राजनीतिक विश्लेषक, " अमनून अबरामोफित्श" ने भी कहा है कि नेतेन्याहू ने अपने भाषण में पहली बार इस्राईल की सुरक्षा स्थिति के बारे में सच्चाई से बात की है और यह बताया है कि हालात कितने खराब हैं। क्योंकि इस्राईल के वरिष्ठ सुरक्षा व राजनतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय इस्राईल की सुरक्षा स्थिति सन 1973 के युद्ध से पहले जैसी है।
याद रहे इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू ने शपथ ग्रहण के समय इस्राईली संसद में कहा कि एकता सरकार का गठन तत्कालिक ज़रूरत है और इसके लिए सुरक्षा कारण हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस समय सुरक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ी चुनौती का सामना है और यह चुनौती हर हफ्ते बढ़ती जा रही है। जिन लोगों को हालात का पता है वह जानते हैं कि नेतेन्याहू सही कह रहे हैं।