6 अक्टूबर 2019 - 13:05
नई डगर पर सऊदी अरब, पहले बुर्क़े की शर्त हटाई और अब अविवाहित जोड़ों को होटल में कमरा देने का रास्ता किया साफ़!

इस्लामी देश सऊदी अरब ने सितम्बर महीने में आम पर्यटन की घोषणा करते हुए विदेशी महिलाओं को विशेष बुर्क़ा पहनने की शर्त से आज़ाद कर दिया था जो सऊदी अरब में महिलाएं पहनती हैं अब सऊदी अरब ने कहा है कि विदेश पर्यटकों को अब और सुविधाएं दी जाएंगी।

सरकार ने कहा कि अविवाहित जोड़े अब होटल में एक ही कमरे में साथ रह सकते हैं। नए क़ानून  के अनुसार कोई भी मर्द या औरत होटल में अपने नाम से कमरा बुक करवाने के बाद किसी भी विदेशी महिला या पुरुष को अपने साथ रख सकेगा।

 

सऊदी अरब के ओकाज़ अख़बार ने जिसे सरकारी अख़बार समझा जाता है एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसके अनुसार सऊदी अरब के कमीशन फ़ार टूरिज़्म एंड नेशनल हेरीटेज ने इस बात की पुष्टि की है अब किसी भी विदेशी महिला या पुरुष को कमरे में अपने साथ महिला या पुरुष को रखने के लिए कोई दस्तावेज़ नहीं दिखाना होगा।

सऊदी महिलाओं को भी होटल में कमरा बुक करने की अनुमति मिल गई है लेकिन यह शर्त रखी गई है कि सऊदी महिला को अपनी पहिचान ज़ाहिर करनी होगी। इससे पहले सऊदी महिला को होटल में तभी कमरा दिया जाता था जब उसके घर के किसी पुरुष की ओर से इसकी लिखित अनुमति मिली हो।

सऊदी अरब वह देश है जहां वहाबियत का दबदबा रहा है और कट्टरपंथी वहाबी विचारधारा सऊदी अरब की सत्ता में प्रभावी रही है लेकिन जब से क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने देश का संचालन अपने हाथ में लिया है तब से वह बहुत तेज़ी से देश का प्रारूप, रहन सहन  और माहौल बदलने की कोशिश कर रहे हैं। बिन सलमान के बारे में कहा जाता है कि वह सऊदी अरब का माहौल संयुक्त अरब इमारात जैसा बना देना चाहते हैं क्योंकि इमारात के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ाएद शायद बिन सलमान के लिए आइडियल हैं।

 

बिन सलमान के इस रुजहान को अमरीका और यूरोपीय देशों में सराहा जा रहा है क्योंकि वह रूढ़िवादी सऊदी समाज को माडर्न पश्चिमी समाज बना देने के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें भी लगता है कि यही विकास का सही रास्ता है।

 

इस बीच सबसे बड़ी लड़ाई सऊदी अरब के भीतर है। सऊदी अरब में वहाबी विचारधारा से जुड़े लोगों के लिए इस स्थिति को सहन कर पाना बेहद कठिन हो रहा है। सऊदी अरब का आले शैख़ परिवार पूरे देश ही नहीं दुनिया में वहाबी विचारधारा फैलाने को अपना कर्तव्य समझता है और बहुत बड़े पैमाने पर इस उद्देश्य के लिए पैसे खर्च करता है मगर अब जब ख़ुद सऊदी अरब के भीतर ही पूरी वहाबी विचारधारा और तंत्र को चुनौती मिल रही है तो निश्चित रूप से टकराव की स्थिति पैदा होगी।