सैयद अब्बास मूसवी ने बुधवार को ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम और उसकी मीज़ाइल क्षमता के बारे में नैटो के महासचिव के दावे और हस्क्षेपपूर्ण बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान, देशों के आंतरिक और फ़ार्स की खाड़ी के मामलों में बाहरी शक्तियों और सुरक्षा एजेंसियों के हस्तक्षेपपूर्ण बयानों की आलोचना करता है और उसका मानना है कि क्षेत्र के सुरक्षा मामलों में बाहरी ताक़तों का हस्तक्षेप, स्वयं ही अशांति व तनाव बढ़ने का कारण है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि नैटो के महासचिव को क्षेत्र के मामलों में हस्तक्षेप के बजाए मध्यपूर्व और पश्चिमी एशिया में इस सैन्य संगठन के हस्तक्षेप के विध्वंसक परिणामों का जवाब देना चाहिए क्योंकि इसके हस्तक्षेप से असैनिकों के जनसंहार, आतंकवाद में वृद्धि, मादक पदार्थों की पैदावार में बढ़ोतरी और अशांति व असुरक्षा में वृद्धि के अलावा कुछ नहीं हुआ है।
सैयद अब्बास मूसवी ने इस बात पर बल देते हुए कि मध्यपूर्व की सुरक्षा बाहरी शक्तियों की उपस्थिति के बिना ख़ुद क्षेत्र के देशों को सुनिश्चित बनानी चाहिए, कहा कि ईरान संसार के अन्य सभी स्वाधीन देशों की तरह प्रतिरक्षा के प्रचलित कार्यक्रम तैयार करने का हक़ रखता है और इसी दायरे में उसका मीज़ाइल कार्यक्रम प्रतिरक्षा व प्रतिरोध के लिए है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अकारण चिंता जताने से अपने मीज़ाइल कार्यक्रम को मज़बूत बनाने के ईरान के संकल्प पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।