14 सितंबर 2019 - 17:25
जब डोनल्ड ट्रम्प ने ट्विटर पर फैलाई फेक न्यूज़, क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ कैसे फैलती है?

डोनल्ड ट्रम्प रोज़ाना बहुत सारे ट्वीट करते रहते हैं लेकिन उनके कई ट्वीट का वास्तविकता से कोई लेना-देना ही नहीं होता है।

डोनल्ड ट्रम्प बार-बार लगातार फेक न्यूज़ के बारे में शिकायत करते हैं, लेकिन जब स्वयं फेक न्यूज़ फैलाने की बात आती है तो वे इस काम में उस्ताद हैं। ट्रम्प ट्विटर का बहुत ही ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं और फेक न्यूज़ संवाद के तरीक़े और उनकी बातचीत की नियमित शब्दावली का एक हिस्सा बन गई है। 2018 में उन्होंने एक ट्वीट किया, इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि ओबामा के राष्ट्रपति रहते समय गूगल उनके स्टेट ऑफ द यूनियन के भाषणों को अपने होमपेज पर दिखाता था, लेकिन उनके राष्ट्रपति बनने के बाद गूगल ने ऐसा करना बंद कर दिया है, लेकिन उनका यह दावा ग़लत निकला।

क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज कैसे फैलती है? यह कैसे लोगों को प्रभावित करती है? कैसे यह मीडिया के पुराने माध्यमों के इतर दूसरे देशों तक पहुंच जाती है? और कैसे इसे ठीक किया जा सकता है?

जर्मनी के कोलोन शहर में काम कर रही एक कंपनी यूनीसेप्टर, मीडिया एनालिसिस की विशेषज्ञ है। कंपनी ने इसका विश्लेषण किया कि ट्रम्प का गूगल वाला ट्वीट कैसे दुनिया भर में फैला। कंपनी के शोध प्रमुख वोल्फ डीटर रूल इस बात को लेकर बहुत उत्साहित हैं, क्योंकि यह पहली बार है जब कोई राष्ट्रपति एक नियोजित तरीक़े से झूठी या भ्रामक सूचनाएं फैला रहा है। डोनल्ड ट्रम्प इसमें कितने सफल हैं और वे ऐसा क्यों करते हैं? मीडिया एनालिस्ट वोल्फ डीटर रूल कहते हैं कि ट्रम्प ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें अपने झूठों के पकड़े जाने की चिंता नहीं है। रूल के अनुसार, "उनका असली लक्ष्य अपने समर्थकों तक बात पहुंचाना है जो उन पर भरोसा करते हैं।" ट्रम्प अपने समर्थकों की तादाद को और बढ़ाना चाहते हैं, जो उनसे किसी बात पर थोड़ा भी सहमत है उन्हें वे अपने समर्थकों में शामिल करना चाहते हैं। ट्रम्प मीडिया के समांतर एक और मीडिया माध्यम खड़ा कर रहे हैं।

ट्रंप के समर्थकों को देखकर पता चलता है कि उनकी एक बड़ी ऑडियंस है। गूगल पर आरोप लगाने वाला उनका वीडियो क़रीब 47 लाख बार देखा गया। इसे 40 हज़ार से ज़्यादा रिट्वीट और 1 लाख 8 हज़ार से अधिक लाइक्स मिले। वोल्फ डीटर रूल इस ट्वीट के बारे में कहते हैं, "फेक न्यूज़ तेज़ी से फैलती है और इसे ट्रम्प के समर्थकों द्वारा तेज़ी से फैलाया जाता है।" ऐसी फेक न्यूज़ की सच्चाई बताने वाला पहला मीडिया रिएक्शन अकसर जल्दी आ जाता है, लेकिन इस मामले में क़रीब डेढ़ घंटे बाद ऐसा हुआ। बजफीड के एक पत्रकार ने ट्वीट किया कि 2017 में डोनल्ड ट्रम्प ने कोई भी स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण दिया ही नहीं था जैसा कि अकसर नए राष्ट्रपति देते हैं। उन्होंने पहला ऐसा भाषण 2018 में दिया था जिसका लिंक गूगल ने अपने होमपेज पर लगाया था, लेकिन इस ट्वीट को ट्रम्प के ट्वीट जैसा समर्थन नहीं मिला। इस ट्वीट को बस तीन हज़ार के आसपास रिट्वीट मिले, झूठे ट्वीट से 12 गुना कम। मीडिया एनालिस्ट वोल्फ डीटर रूल कहते हैं कि यह एक सामान्य पैटर्न है, फेक न्यूज़ हमेशा सच्चाई से अधिक तेज़ी से फैलती है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि फेक न्यूज़ को फैलाने का काम अधिकतर मुख्यधारा की मीडिया भी करती है। ऐसा ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के ट्वीट के साथ हुआ। बहुत सी मीडिया कंपनियों ने इस मुद्दे को बिना सच्चाई जाने छापना शुरू कर दिया। पहले अमेरिका में और फिर पूरी दुनिया में इसे छापा गया। ट्रम्प ने केवल एक झूठ बोलकर कम से कम प्रयास किए और अधिक से अधिक लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।