इस बात में तो कोई शक ही नहीं है कि राजधानी बैरुत के दक्षिणी ज़ाहिया पर इस्राईल के ड्रोन हमलों का जवाब देने की जो सैयद हसन नसरुल्लाह ने धमकी दी है वह उसे हर हाल में पूरा करके रहेंगे लेकिन सवाल यह है कि यह जवाब कहां दिया जाएगा, कैसा होगा, कितना बड़ा और प्रभावशाली होगा और उसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं?
वैसे यह तो सभी मानते हैं कि मौत की सज़ा का फैसला, खुद सज़ा से ज़्यादा पीड़ा देता है। इस वक़्त इस्राईल का भी यही हाल है और वह जल्द ही जवाबी कार्यवाही के डर से बौखलाया हुआ है इसी लिए इस्राईल में असाधारण रूप से सेना, युद्धक विमानों और आयरन डोम एन्टी मिसाइल व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इस्राईली ड्रोन विमान और इसी तरह उसके युद्धक विमान, लेबनान की वायु सीमा का उल्लंघन करते रहते हैं। गत कई वर्षों के दौरान इस्राईल ने सीरिया में हमलों या हिज़्बुल्लाह के काफ़िलों पर राकेट हमलों के लिए लेबनान की वायु सीमा को गैर कानूनी रूप से बार- बार प्रयोग किया है यह कोई नयी बात नहीं है किंतु हमारे विचार ने इस बार जिस चीज़ ने हसन नसरुल्लाह के गुस्से को भड़काया है वह यह है कि इस बार इस्राईल के दो ड्रोन विमानों ने लेबनान की वायु सीमा का उल्लंघन हिज़्बुल्लाह के एक वरिष्ठ कमांडर की हत्या के लिए किया था जिसके नाम का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
रिपोर्टों के अनुसार पहला ड्रोन विमान, खोजी था और उसी की मदद से ज़ाहिया में हिज़्बुल्लाह के उस कमांडर की आवाजाही पर नज़र रखने की कोशिश की जा रही थी। दर अस्ल, ज़ाहिया में हिज़्बुल्लाह के बेहद महत्वपूर्ण मेहमानों के स्वागत का एक खुफिया ठिकाना है। यह भी कहा जा रहा है कि इस्राईल जिस हस्ती को निशाना बनाना चाहता था वह हिज़्बुल्लाह, उसके कमांडरों और आईआरजीसी के कुद्स ब्रिगेड के प्रसिद्ध कमांडर, जनरल सुलैमानी के बीच संपर्क की महत्वपूर्ण कड़ी है बल्कि यह भी हो सकता है कि जनरल सुलैमानी को ही निशाना बनाने की कोशिश की जा रही थी। इस हत्या में बम से भरे ड्रोन को इस्तेमाल किया जाना था लेकिन खोजी विमान के गिरने के बाद उसे इस्राईल ने स्वंय ही तबाह कर दिया और हत्या की यह कोशिश नाकाम हो गयी।
यह कोशिश भी गत 13 वर्षों के दौरान और सन 2006 के युद्ध के बाद से ईरान के घटकों को निशाना बनाने के इस्राईली अभियान का हिस्सा है जिसके तहत गत कुछ दिनों के दौरान इस्राईल ने इराक़, सीरिया और लेबनान में ईरान के घटकों को निशाना बनाया है ताकि ईरान को जवाबी कार्यवाही पर उकसाया जा सके और फिर एक ऐसा युद्ध आरंभ हो जिसमें अमरीका भी कूद पड़े लेकिन ईरानी नेतृत्व ने सयंम से काम लेते हुए जाल में फंसने से स्वंय को बचा रखा है कम से कम अब तक।
सैयद हसन नसरुल्लाह ने जवाबी कार्यवाही का समय नहीं बताया है, बस यही कहा है कि आज, या दो दिनों बाद या तीन चार दिनों बाद, यह स्वभाविक भी है क्योंकि हिज़्बुल्लाह के सैन्य कमांडर जवाबी हमले की योजना बनाएंगे और हमला करने वाले, तारीख और निशाने का निर्धारण करेंगे और हमें पूरी उम्मीद है कि यह जवाबी कार्यवाही इस्राईल के लिए बेहद पीड़ादायक होगी और नेतेन्याहू परेशानी में पड़ जाएंगे बल्कि इससे उनके राजनीतिक भविष्य पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
क्षेत्र के राजनीतिक व सैन्य गलियारों में यह सवाल घूम रहा है कि हिज़्बुल्लाह की ओर से जवाबी कार्यवाही के बाद क्या होगा? क्या इस्राईली नेतृत्व, हिज़्बुल्लाह की जवाबी कार्यवाही को अमरीकी दबाव की वजह से युद्ध से दूर रहने के लिए, पी जाएगा या फिर वह भी जवाब देगा? और अगर ऐसा हुआ तो फिर हिज़्बुल्लाह, इस्राईल के नगरों, हवाई अड्डों, बिजली घरों और महत्वपूर्ण ठिकानों पर राकेटों की बरसात कर देगा क्योंकि सैयद हसन नसरुल्लाह और हिज़्बुल्लाह के अन्य नेता, हर स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और यह जो उन्होंने एलान किया है कि बैतुलमुक़द्दस को आज़ाद कराने के बाद वहां नमाज़ पढ़ेगें, वह, उनके युद्ध के ठोस संकल्प को दर्शाता है। इस दशा में वह युद्ध का फैसला, आत्मरक्षा के लिए करेंगे और फिर उसके हर परिणाम के लिए तैयार रहेंगे। इस्राईल के हालिया अतिक्रमण ने उन्हें यह ऐतिहासिक अवसर प्रदान कर दिया, आज लेबनानी जनता के अधिक लोग उनके पीछे खड़े हैं जिनमें सब से ऊपर लेबनानी राष्ट्रपति मिशल सुलैमान हैं जिन्हें साहस और ज़िम्मेदारी के साथ यह कहा है कि लेबनान पर इस्राईली हमला, युद्ध की घोषणा है जिससे लेबनान और उसकी सेना को जवाबी कार्यवाही का अधिकार मिलता है। इस साहसित रुख का सीधा अर्थ यह है कि लेबनान, उसकी प्रतिष्ठा और प्रभुसत्ता की रक्षा के लिए लेबनानी सेना, हिज़्बुल्लाह के साथ खड़ी है।
आने वाले दिन, ऐतिहासिक, बल्कि मध्य पूर्व ही नहीं पूरी दुनिया के लिए अहम मोड़ साबित हो सकते हैं जिसने भी इस्राईल के इस हमले के बारे में बात करते हुए सैयद हसन नसरुल्लाह के चेहरे के हाव- भाव को ध्यान से देखा होगा वह समझ रहा होगा कि हम कुछ बढ़ा- चढ़ा कर बात नहीं कर रहे हैं।
लेबनान, इराक़ और सीरिया पर इस्राईली अतिक्रमण के बाद जो तीन राकेट, गज़्ज़ा से इस्राईल पर दागे गये वह वास्तव में यह संदेश लिए हुए थे कि अगले किसी भी युद्ध में हिज़्बुल्लाह अकेला नहीं होगा और अगले युद्ध में आत्म सम्मान की रक्षा के लिए सारे मोर्चे खोल दिये जाएंगे और हर हाल में, हमारा इंतेज़ार, ज़्यादा लंबा नहीं होगा, आप लोग भी देख ही लेंगे।