21 अगस्त 2019 - 13:38
क्यों, सऊदी अरब जैसी तानाशाही सरकारें, अमरीका व इस्राईल की सेवक हैं? महत्वपूर्ण वजह बतायी अब्दुलमिलक अलहौसी ने

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के महासचिव ने ईदे ग़दीर के अवसर पर अपने भाषण में कहा कहा कि ईश्वरीय दूत के उत्तराधिकारियों में आस्था न होने की वजह से कुछ इस्लामी देशों के शासक, अमरीका और ज़ायोनी शासन के पिट्ठू बन गये हैं।

अब्दुलमलिक बदरुद्दीन अलहौसी ने ईदे ग़दीर के अवसर पर अपने भाषण में कहा कि इस समय के भ्रष्ट शासक न केवल यह कि यमन जैसे देशों की स्वाधीनता को पसन्द नहीं करते बल्कि स्वंय अमरीका जैसे साम्राज्यवादी देशों से संबंध रखते हैं और उसके सेवक बने हैं जब यह देश इस्लामी जगत का सब से बड़ा दुश्मन है। 

उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए कि " विलायत" अर्थात ईश्वरीय दूत पैगम्बरे इ्सलाम के विशेष उत्तराधिकारियों में आस्था का सिद्धान्त, मुसलमानों को सभी साम्राज्यवादियों और अत्याचारियों से दूर करता है, कहा कि इस्लामी राष्ट्र के दुश्मन और तानाशाही सरकारें, जो इस्राईल व अमरीका की एजेन्ट हैं, इ्सलामी जगत पर वर्चस्व की इच्छुक हैं। 

अंसारुल्लाह के महासचिव ने बल दिया कि कि यदि " विलायत" का सिद्धान्त न हो तो फिर दाइश और इस प्रकार के विभिन्न भ्रामक व भटकाने वाले संगठन बनने की भूमिका तैयार होती है और इस स्थिति से अमरीका और इस्राईल को यह अवसर मिलता है कि वह इस्लामी राष्ट्र के ह्रदय तक घुस जाएं। 

आज मंगलवार और 18 ज़िलहिज्जा सन 1440 हिजरी क़मरी बराबर 20 अगस्त सन 2019 है और यह दिन इस्लामी कैलेंडर के अनुसार " ग़दीरे खुम" की ईद और वह दिन है जब पैगम्बरे इस्लाम ने हज़रत अली को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।