मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने बुधवार को स्टाॅकहोम इंटरनैश्नल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) में भाषण करते हुए परमाणु समझौते के पक्षों की कटिबद्धताओं और इन कटिबद्धताओं के पालन न किए जाने के संबंध में इस समझौते में दृष्टिगत रखी गई व्यवस्था की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अमरीका, इस समझौते को अपने हित में एक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता। उन्होंने परमाणु समझौते के अंतर्गत अपनी स्वेच्छित प्रतिबद्धताओं को कम करने के ईरान के तीसरे क़दम के बारे में कहा कि यह क़दम निश्चित रूप से पिछले दो क़दमों से अधिक मज़बूत होगा।
विदेश मंत्री ज़रीफ़ ने अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के अप्रत्याशित व्यवहार की तरफ़ इशारा कतरे हुए कहा कि जब आप अप्रत्याशित काम करते हैं तो दूसरे पक्ष भी अप्रत्याशित क़दम उठाते हैं और इससे अराजकता फैलती है। उन्होंने फ़ार्स की खाड़ी में अमरीका व यूरोप के सैन्य गठजोड़ की उपस्थिति के बारे में कहा कि यह गठजोड़ इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थापित करने की क्षमता नहीं रखता। ज़रीफ़ ने कहा कि फ़ार्स की खाड़ी और ओमान सागर में ईरान की डेढ़ हज़ार किलो मीटर समुद्री सीमा है और कोई भी बेड़ा या सेना इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थापित नहीं कर सकती। उन्होंने सऊदी अरब और कुछ अन्य क्षेत्रीय देशों द्वारा अधिक से अधिक हथियार ख़रीदे जाने की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि क्षेत्र की सुरक्षा, ख़रीदी जाने वाली चीज़ नहीं है।