ब्रिटेन ने 4 जूलाई को ईरान के ग्रेस-1 नामक एक ऑयल टैंकर को जिब्राल्टर स्ट्रेट में यह कह कर रोक लिया कि यह ऑयल टैंकर सीरिया जा रहा है और सीरिया पर यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगा रखा है।
इस तेल टैंकर के मालिकों और उनके वकीलों के कई हफ्तों तक जारी प्रयासों और ईरान के दबाव के बाद गत गुरुवार को जिब्राल्टर के उच्चतम न्यायालय ने ईरान के ग्रेस -1 ऑयल टैंकर को छोड़ने का आदेश दिया जिसके बाद ईरान ने घोषणा की कि ग्रेस-1 का नाम बदल कर " आदरियाने दरिया " रख दिया गया है जिसके बाद इस ऑयल टैंकर को इसी नाम से रजिस्टर्ड कर लिया गया। ईरान द्वारा ग्रेस- 1 का " आद्रियाने दरिया" नाम रखे जाने पर कई लोगों के मन में इस नये नाम के बारे में सवाल उठ सकते हैं।
वास्तव में " आदरियान" यूनानी शब्द " आद्रियानोस " या " हाद्रियानोस" से निकला है और स्वंय यह यूनानी शब्द, " आदोर" से निकला है जिसका अर्थ समुद्र या फिर पानी रोकना है।
दर अस्ल , " आद्रियानोस " या " हाद्रियानोस" दूसरी ईसवी शताब्दी में रोम के सम्राट का नाम है जिसने सन 122 ईसवी में रोम और प्राचीन इंगलैंड के बीच एक दीवार बनायी थी जिसे बाद में " हाद्रियान" और " आद्रियान" कहा जाने लगा।
यह दीवार इस लिए बनायी गयी थी ताकि इंगलैड के केल्ट क़बीले के हमलों को रोका जा सके।
इस दीवार के अवशेष आज भी इंगलैंड में मौजूद हैं।
इस दीवार की लंबाई 117 किमी थी और सन 1987 में इस दीवार को रोमन साम्राज्य की सीमा के रूप में यूनिस्को में विश्व धरोहर के रूप में पंजीकृत किया गया।
इस रोचक तथ्य के बाद यह अनुमान लगाना आसान है कि ईरान ने क्यों अपने आयल टैंकर का नाम इस दीवार और रोमन शासक के नाम पर रखा?
आद्रियान दरिया, अर्थात समुद्री दीवार वास्तव ने ब्रिटिश लुटेरों से ईरानी हितों की रक्षा की और यही वजह है कि इसे ब्रिटेन से जीत के बाद ईरानी आयल टैंकर का एक बेहतरीन नाम कहा जा रहा है।