ट्रम्प सरकार के दक्षिणपंथियों ने ईरान में अमरीका के अत्यंत विकसित ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद होने वाली फ़ज़ीहत का बदला लेने के लिए प्राॅक्सी वाॅर शुरू की और ब्रेगज़िट के बाद ब्रिटेन की बुरी आंतरिक व राजनैतिक स्थिति से लाभ उठा कर इस बात की कोशिश की कि उसे अपने हितों के लिए प्रयोग करें। आरंभ में तो ब्रिटेन के राजनेताओं ने उनका साथ दिया लेकिन जल्द ही अपना रुख़ बदल लिया और जब फ़ितना फैलाने वाली "बी टीम" के प्रमुख के रूप में अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जाॅन बोलटन लंदन पहुंचे हुए थे तो ब्रिटेन ने जिब्रालटर की स्थानीय सरकार ने ईरान तेल टैंकर को छोड़ने के लिए हरी झंडी दिखा दी। इस प्रकार लंदन थोड़े से ही समय के लिए सही, बी टीम के जाल से निकल गया।
टीकाकारों का कहना है कि अब ट्रम्प सरकार में शामिल अमरीकी व ज़ायोनी दक्षिणपंथी, लंदन और ईरान के तेल टैंकर को छुड़ाने में भूमिका निभाने वाले दूसरे पक्षों से बदला लेने की कोशिश करेंगे। इस पूरे मामले में बी टीम को दो अन्य पराजयों का सामना करना पड़ा है। प्रथम तो यह कि उसने जिब्रालटर की अदालत में याचिका दायर करके उसके न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप करने और ग्रेस-1 को छोड़ने में बाधा डालने की कोशिश की लेकिन यह टीम विफल रही। दूसरे यह कि इसके बाद इस टीम के लोगों ने ईरान के तेल टैंकर को रोकने की धमकी दी लेकिन अपने धमकी को व्यवहारिक बनाने की उनमें हिम्मत नहीं थी जैसा कि फ़ार्स की खाड़ी में अमरीका के विकसित ड्रोन को मार गिराए जाने की घटना में भी उन्होंने इसी प्रकार की धमकी दी थी और फिर पीछे हट गए थे।