तेहरान में ईदुल अज़हा की केंद्रीय नमाज़, इमाम ख़ुमैनी ईदगाह में अदा की गई। नमाज़ के ख़ुतबों में हुज्जतुल इस्लाम वल मुसलेमीन अबू तुराबी फ़र्द ने कहा कि इस्लामी प्रतिरोधकर्ता मोर्चे ने प्रतिरोध व स्वावलंबन का पाठ, हज़रत इब्राहीम के मत से सीखा है। उन्होंने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने ईरानी जनता को वर्चस्ववादी साम्राजी व्यवस्था के मुक़ाबले में एक आदर्श प्रतिरोधकर्ता राष्ट्र में बदल दिया। उन्होंने कहा कि आज इस्लामी क्रांति की शक्ति, वैभव और महानता, हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और इमाम ख़ुमैनी के प्रतिरोधक मार्ग का ही क्रम है।
उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति संरक्षक बल के सिपाहियों ने फ़ार्स की खाड़ी में अमरीकी ड्रोन ग्लोबल हाॅक को मार गिराने के साथ ही अमरीका की खोखली शक्ति की भी पोल खोल दी। तेहरान में ईदुल अज़हा की केंद्रीय नमाज़ के इमाम ने कहा कि फ़ार्स की खाड़ी में यह ब्रिटिश समुद्री युद्धक जहाज़ नहीं था जिसने आईआरजीसी के सामने असहायता का प्रदर्शन किया बल्कि यह ग्रेट ब्रिटेन था जिसने ईरान के सामने घुटने टेके हैं। उन्होंने ज़ायोनी व सऊदी सरकारों के अत्याचारों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि इन अत्याचारी शासनों की तबाही निश्चित है। तेहरान में ईदुल अज़हा की केंद्रीय नमाज़ के इमाम ने कहा कि इराक़, सीरिया, लेबनान और यमन की जनता हज़रत इब्राहीम अलैहस्सलाम के संघर्ष को दृष्टिगत रखते हुए, दुश्मनों के मुक़ाबले में डटी हुई है। उन्होंने इस्लामी गणतंत्र ईरान और प्रतिरोध के मोर्चे को अजेय बताते हुए कहा कि यह हज़रत इब्राहीम की वही राह है जिसने आग को फूल में दुश्मनों की चालों को सत्य के मोर्चे की विजय में बदल दिया था।
तेहरान में ईदुल अज़हा की केंद्रीय नमाज़ के इमाम अबू तुराबी फ़र्द ने कहा कि ईरान, चार दशकों से हज़रत इब्राहीम के मार्ग पर अग्रसर है और अमरीका व अन्य साम्राज्यवादी शक्तियों के सामने डटा हुआ है। उन्होंने कहा कि हज़रत इब्राहीम के इसी मार्ग पर चलते हुए अत्याचारग्रस्त फ़िलिस्तीनी जनता, महिलाओं और बच्चों ने अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन के मुक़ाबले में प्रतिरोध का प्रदर्शन किया है। तेहरान में ईदुल अज़हा की केंद्रीय नमाज़ के इमाम ने कहा कि ईरानी जनता द्वारा हज़रत इब्राहीम के मत के सिद्धांतों व मान्यताओं से भरपूर लाभ उठाना, धार्मिक आधारों पर डटे रहना और ज्ञान-विज्ञान का सही इस्तेमाल भी हज़रत इब्राहीम के सिद्धांतों व लक्ष्यों में शामिल है। उन्होंने क्षेत्र में ज़ायोनी शासन, आले सऊद और आले ख़लीफ़ा के अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सरकारों का अंत हो कर रहेगा।