10 अगस्त 2019 - 14:02
ट्रंप ने किन कारणों से कहा कि ईरान से वार्ता के लिए हमारा कोई प्रतिनिधि नहीं

तेहरान से वार्ता के लिए ट्रंप ने अभी हाल ही में न्यूयार्क में विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ के पास निमंत्रण भी भेजा था जिसे विदेश मंत्री ने स्वीकार नहीं किया था

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना सुर बदलते हुए कहा है कि ईरान से वार्ता के लिए कोई भी देश उनका प्रतिनिधि नहीं है। समाचार एजेन्सी तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गुरूवार को अपने ट्वीटर हैंडल पर बल देकर लिखा कि अमेरिका ने किसी भी देश को इस बात की अनुमति नहीं दी है कि वह ईरान से वार्ता में वाशिंग्टन का प्रतिनिधि बने।  

ट्रंप ने इस ट्वीट में ईरान की आर्थिक स्थिति के ख़राब होने पर आधारित इससे पहले वाले अपने दावे की पुनरावृत्ति करते हुए कहा कि ईरानी निराशा की स्थिति में अमेरिका से वार्ता करना चाहते हैं किन्तु उन्हें कुछ पक्षों की ओर विरोधाभासी सिग्नल मिल रहे हैं और ऐसा लगा रहा है कि वे हमारे प्रतिनिधि हैं।

ट्रंप ने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि मैं जानता हूं कि एमानोएल मैक्रां और दूसरे अच्छी नियत रखते हैं किन्तु अमेरिका के अलावा कोई भी इस देश की ओर से वार्ता नहीं कर सकता। हमने किसी को भी अपना प्रतिनिधि बनने की अनुमति नहीं दी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति यह दिखाना व बताना चाहते हैं कि हालिया महीनों में कुछ अधिकारी व नेता जो तेहरान की यात्रा पर आये थे वे अमेरिका के आह्वान पर नहीं आये थे परंतु उनके इससे पहले के बयान कुछ और ही साबित करते हैं।

ज्ञात रहे कि जापान के प्रधानमंत्री शिन्ज़ो आबे की तेहरान यात्रा के बाद ट्रंप ने उनका धन्यवाद किया था और उनकी प्रशंसा भी की थी। इसी प्रकार जब फ्रांस के राष्ट्रपति एमानोएल मैक्रां ने अपने ईरानी समकक्ष राष्ट्रपति रूहानी और रूस से बात करने हेतु अपनी तत्परता की घोषणा की थी तो ट्रंप ने उनके इस कदम का स्वागत किया था।

जानकार हल्कों का मानना है कि ट्रंप यह दिखाना चाहते हैं कि ईरानी उनसे वार्ता के लिए आतुर हैं जबकि वास्तविकता और सच्चाई यह है कि ट्रंप और अमेरिका के विदेशमंत्री ईरान से वार्ता के लिए व्याकुल हैं इसीलिए उन्होंने बारमबार घोषणा की है कि वे किसी शर्ता के बिना ईरान से वार्ता के लिए तैयार हैं और तेहरान से वार्ता के लिए ट्रंप ने अभी हाल ही में न्यूयार्क में विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ के पास निमंत्रण भी भेजा था जिसे विदेश मंत्री ने स्वीकार नहीं किया और ईरानी अधिकारियों ने बारमबार कहा है कि वे किसी भी स्थिति में अमेरिका से वार्ता नहीं करेंगे।

अजीब बात है कि बहुत से देश अमेरिका और ट्रंप से वार्ता पर गर्व करते हैं परंतु ईरान ने नो लिप्ट करके अमेरिका को उसकी औक़ात बता दी है और ट्रंप इस वास्तविकता से आम जनमत का ध्यान हटाने के लिए यह कह रहे हैं कि ईरानी निराशा की स्थिति में उनसे बात करना चाहते हैं।