8 अगस्त 2019 - 13:24
तीसरे विश्य युद्ध का फैसला कौन करेगा, और कहां से होगा यह शुरु? बताया रूसी न्यूज़ एजेन्सी ने

रूसी न्यूज़ एजेन्सी स्पूतनिक ने तीसरे विश्व युद्ध और उसके लिए हालात तथा चीन व अमरीका के मध्य प्रतिस्पर्धा पर एक पढ़ने योग्य रिपोर्ट प्रकाशित की है।

न्यूयार्क यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने अपने हालिया लेख में बताया है कि चीन अमरीकी हितों के लिए सब से बड़ा खतरा है लेकिन इस खतरे से मुक़ाबले के लिए रिपब्लिकंस और डेमोक्रेट्स में समन्वय नहीं है।

     स्पूतनिक ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि न्यूयार्क विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, पीटर बीनार्ट ने बल दिया है कि वाइट हाउस में अगली बार क़दम रखने वाले को तीसरे विश्व युद्ध के बारे में फैसला करना होगा। ग्राहम एलसन के हालिया अध्ययन से पता चलता है कि अमरीका और चीन के मध्य युद्ध की आशंका, युद्ध न होने की संभावना से कहीं अधिक है। यह युद्ध संभावित रूप से ताइवान या दक्षिणी चीन सागर से आरंभ होगा।

 जब से डोनाल्ड ट्रम्प अमरीका की सत्ता में आए हैं, अमरीकी ने चीन को औपचारिक रूप से अपना रणनीतिक प्रतिद्वंदी समझ लिया है। अमरीकी युद्धपोतों की ताइवान स्ट्रेट में आवाजाही बढ़ गयी है और बीजिंग ने बार बार इस बारे में अमरीका को चेतावनी भी दी है। चीन तो ताइवान को वापस लेने के लिए भी युद्ध कर लेगा। चीन व अमरीका के मध्य सैन्य वार्ता बहुत पहले से ही ख़त्म हो चुकी है। पिछले महीने ही राजनीति शास्त्र के कई विशेषज्ञों ने एक खुल खत में ट्रम्प को अमरीका व चीन के मध्य जटिल संबंधों के बारे में चेतावनी दी थी। इन हालात में यह आसानी से समझा जा सकता है कि डेमोक्रेट्स क्यों अमरीका व चीन के मध्य राजनीतिक व सैनिक संबंधों पर अधिक बात नहीं करते। चीन के साथ व्यापार सीधे रूप से अमरीकी जनता के जीवन पर प्रभाव डालता है।  

     डेमोक्रेट्स, चीन और अमरीका के मध्य शीत युद्ध की अनदेखी करते हैं लेकिन रिपब्लिकंस इसका स्वागत करते हैं। मार्को रोबीनो और टॉम कॉटन जैसे नौजवान रिपब्लिकंस के लिए जो व्यापारिक युद्ध और अमरीका की सैन्य शक्ति के बारे में ट्रम्प के लोक लुभावन नारों को हमेशा जीवित रखना चाहते हैं, चीन सब से अच्छा विकल्प है। यह वही संगम है जहां ट्रम्पिस्ट और नियो कंज़रवेटिव एक दूसरे से मिल जाते हैं।