7 अगस्त 2019 - 13:59
अमरीकी प्रतिबंध अब कारगर नहीं रहेः रायुल यौम

अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने लिखा है कि डोनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति काल में अमरीका का वैभव बड़ी तेज़ी से समाप्त होता जा रहा है और उसके प्रतिबंधों की शक्ति ख़त्म हो गई है।

रायुल यौम के संपादकीय में कहा गया है कि उत्तरी कोरिया की ओर से लम्बी दूरी की मारक क्षमता वाले मीज़ाइलों का परीक्षण, अमरीका द्वारा दक्षिणी कोरिया, आस्ट्रेलिया व जापान में मध्यम दूरी के परमाणु मीज़ाइल तैनात करने के फ़ैसले के बाद पूर्वी एशिया में अमरीका व चीन के बीच बढ़ते संकट का ताज़ा अध्याय है। पत्र ने विश्व मंच पर अमरीका की ज़ोर-ज़बरदस्ती वाली नीतियों की विफलता की ओर इशारा करते हुए लिखा है कि उत्तरी कोरिया के नेताओं ने अमरीका के अंदर तक मार करेन वाले मीज़ाइलों का परीक्षण करके, अमरीका को मज़बूत चुनौती देने का फ़ैसला किया है। अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जाॅन बोलटन ने उत्तरी कोरिया के इस क़दम को सिंगापुर व हनोई में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग ऊन की मुलाक़ातों में होने वाली सहमति का उल्लंघन बताया है।

 

चीन, अमरीका की नई भड़काऊ कार्यवाहियों पर हाथ पर हाथ धरे चुप नहीं बैठा रहेगा। दक्षिणी कोरिया, आस्ट्रेलिया व जापान में मध्यम दूरी के परमाणु मीज़ाइल तैनात करने का अमरीका का फ़ैसला, चीन के प्रभाव वाले क्षेत्रों की सुरक्षा व स्थिरता के लिए एक ख़तरा है और इस बात की संभावना है कि उत्तरी कोरिया के चौंकाने वाले मीज़ाइल परीक्षण, चीन की प्रतिक्रिया के परिप्रेक्ष्य में हों। अमरीका व चीन के बीच आर्थिक युद्ध इन दिनों अभूतपूर्व तनाव के चरण में पहुंच गया है और चीन ने अपनी 300 अरब डाॅलर की वस्तुओं के अमरीका निर्यात पर टैक्स लगाने के ट्रम्प के फ़ैसले का ठोस जवाब देने का निर्णय किया है। इसी परिप्रेक्ष्य में उसने अमरीका से कृषि उत्पादों के आयात को रोकने और अपनी करंसी का मूल्य कम करने का फ़ैसला किया है ताकि वह अन्य देशों को अपना निर्यात बढ़ा सके। इसी लिए ट्रम्प ने चीन पर करेंसी से खिलवाड़ का आरोप लगाया है।

 

रायुल यौम ने लिखा है कि इस व्यापारिक युद्ध में ट्रम्प सरकार को सबसे बड़ी पराजय होगी क्योंकि वह अत्यंत सुदूर क्षेत्र में इस युद्ध में शामिल हुई है और उसके निकटतम घटक भी विशेष कर यूरोपीय घटक इस युद्ध के विरोधी हैं जिसके चलते वह चकराई हुई है। विवादित मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए चीन व अमरीका के बीच वार्ता विफल होने के बाद अमरीका की आर्थिक मंडियों के मूल्य में तीन प्रतिशत की कमी हो गई और सोमवार को अमरीकी शेयर्ज़ के सूचकांक में लगभग एक हज़ार यूनिट की कमी आई। चीन, अमरीका से बदला लेने के लिए एक और बड़ा क़दम उठाने की तैयारी कर रहा है और वह है विश्व की आर्थिक मंडियों से डाॅलर के वर्चस्व को समाप्त करना। इसके अंतर्गत वह अपने लेन-देन में अमरीकी करेंसी को तेज़ी से समाप्त कर रहा है और उसका स्थान अपनी करेंसी युवान को दे रहा है। चीन का वर्तमान लेन-देन 10 खरब डाॅलर तक पहुंच चुका है और रूस, भारत, पाकिस्तान, तुर्की, ईरान व वेनेज़ुएला की तरह कुछ अरब देश भी इस करेंसी को वैश्विक मुद्रा के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

कुछ टीकाकारों का कहना है कि अगले पांच साल में अमरीकी डाॅलर का वर्चस्व समाप्त हो जाएगा और उसका स्थान युवान ले लेगा। उत्तरी कोरिया के नेता ने ट्रम्प और उनकी धूर्तताओं का मज़ाक़ उड़ाया है और उन्हें कोई भी विशिष्टता दिए बिना दो बार उनसे मुलाक़ात की है। कोरिया ने लम्बी मारक दूरी के ऐसे बैलिस्टिक मीज़ाइलों का परीक्षण भी किया है जिन पर परमाणु वाॅर हेड लगाए जा सकते हैं। समाचारपत्र रायुल यौम ने अंत में लिखा है कि डोनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति काल में अमरीका का वैभव बड़ी तेज़ी से समाप्त होता जा रहा है और उसके प्रतिबंधों की शक्ति ख़त्म हो गई है जबकि चीन बड़ी तेज़ी से दस साल से ही कम समय में सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति का स्थान हासिल करने की ओर अग्रसर है। अमरीका व चीन के बीच व्यापारिक युद्ध में ईरान और प्रतिरोध के मोर्चे को सबसे बड़ा विजेता माना जा सकता है। ईरान के तेल का निर्यात बढ़ता जा रहा है और उसने चीन द्वारा अमरीकी प्रतिबंधों के विरोध के चलते, प्रतिबंधों के चरण को पीछे छोड़ दिया है। भारत, जापान और तुर्की भी जल्द ही चीन से जुड़ जाएंगे और ईरान अधिक प्रभावी हो जाएगा। चीनियों की बुद्धिमत्ता, अमरीकियों के घमंड को पराजित कर देगी और निश्चित रूप से एक दिन डाॅलर की अर्थी उठ जाएगी। आशा है वह दिन जल्दी आएगा और हम इस समाचारपत्र में इस सफलता का जश्न मनाएंगे।