3 अगस्त 2019 - 13:25
क्षेत्र में अमरीका की हर छावनी पर होगी बमबारी, ईरान के इस संदेश से यूएई क्या समझा? अब्दुल बारी अतवान का सुन्दर लेख, हर आयाम पर न

एक विदेशी अरब समाचार पत्र ने लिखा है कि संयुक्त अरब इमारात, ईरान से अपनी दुश्मनी और यमन युद्ध के लंबा खिंचने के ख़तरे को भांपते हुए ईरान के पाले में आ गया है ताकि अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा और आंतरिक एकता को दोबारा हासिल कर सके।

लंदन से प्रकाशित होने वाले अरबी समाचार पत्र राय अलयौम ने अपने लेख में सवाला किया है कि क्या संयुक्त अरब इमारात ने अपने पड़ोसी देश ईरान से संबंधों को बहाल करने के लिए सभी रुकावटों को दूर करना शुरु कर दिया है या संयुक्त अरब इमारात के सुरक्षा प्रतिनिधि मंडल के बाद हम बिन ज़ायद और मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ के बीच मुलाक़ात होते देखेंगे? यमन के सादा प्रांत में अलहूसियों और अबूधाबी के बीच गुप्त वार्ता चैनल की क्या ख़बर है? सऊदी अरब इन सब घटनाओं पर क्या करेगा?

अब्दुल बारी अतवान इस लेख में लिखते हैं कि आजकल संयुक्त अरब इमारात की ओर से अभूतपूर्व कार्यवाहियों का क्रम बहुत अधिक बढ़ गया है। इस देश ने यमन से अपने सैनिकों की एक बड़ी संख्या निकालने के बाद अपना एक सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा और यह इस बात का चिन्ह है कि यूएई, ईरान से अपनी निकटता बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है जिसे कल तक वह क्षेत्र की शांति और सुरक्षा तथा अपने लिए सबसे बड़ा ख़तरा समझता था।

यूएई के अधिकारियों की यह समझ में आ गया है कि चाहे वह राजनैतिक स्तर पर हो या सामरिक स्तर पर, वह पांचवें वर्ष में दाख़िल हो चुके यमन युद्ध से जीतकर नहीं निकल सकते और क्षेत्र में होने वाला हर युद्ध में सबसे अधिक बलि संयुक्त अरब इमारात को देनी होगी क्योंकि ईरानियों में शहादत प्रेम की भावना बहुत अधिक पायी जाती है और इसका उदाहरण अमरीकी ड्रोन विमान को मार गिराना और ब्रिटेन के तेल टैंकर को हिरासत में लेना है क्योंकि ब्रिटेन ने भी ईरान के एक तेल टैंकर को जिब्राल्टर स्ट्रेट में पकड़ लिया है।  यही वहज है कि संयुक्त अरब इमारात बहुत ही फूंक फूंक कर क़दम रख रहा है और उसने सभी स्तरों पर अपने समीकरणों पर पुनर्विचार शुरु कर दिया है।

निकटवर्ती रूसी मध्यस्थों का कहना है कि संयुक्त अरब इमारात के अधिकारियों ने मास्को का दौरा किया और अपने रूसी समकक्षों से अपील की कि वह ईरान को यह स्पष्ट संदेश दे दें कि इमारत, धीरे धीरे यमन से अपने सैनिक निकालना चाहता है और अबूधाबी ईरान से यह अपील करता है कि वह अपने निकट घटक अलहूसियों से मध्यस्थता करे ताकि यमनी संयुक्त अरब इमारात पर अपने हमले रोक दें और ईरान ने इस अपील का फ़ौरन की जवाब दे दिया।

राय अलयौम लिखता है कि सऊदी अरब को अब समझ में आ गया है कि वह यमन युद्ध में अकेला बचा है और उससे अपने देश के भीतर व्यापक स्तर पर यमन के मीज़ाइल और ड्रोन हमलों का सामना है, उसने भी अपनी शैली बदल दी है और वह भी ईरान के साथ संबंध बहाल करने पर उतारू हो गया है।

उदाहरण स्वरूप सऊदी अरब के हज और वक़्फ़ मंत्रालय के प्रतिनिधि मंडल ने मिठाई और फूलों के साथ ईरानी हाजियों का स्वागत किया और यह चीज़ केवल सपने में ही दिखाई दे सकती है क्योंकि सऊदी अरब द्वारा ईरानी हाजियों को परेशान किया जाना और उनको अनेक तरह से यातनाएं दिए जाने के कई केस सामने आ चुके हैं।

हमें यह नहीं पता कि ईरान के साथ यूएई के संबंध और यमन से धीरे धीरे अपने सैनिकों को निकालने तथा अंसारुल्लाह के साथ गुप्त संपर्क करने के लिए अबू धाबी ने अपने रणनैतिक सहयोगी को सूचित किया था या नहीं, लेकिन हवाओं के रूख़ तो कुछ और ही कहानी सुना रहे हैं, जहां सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के संबंधों में खटास की बात हर एक की ज़बान से सुनाई दे रही है।

रोचक बात यह है कि दो मुहम्मद दोस्त, अर्थात मुहम्मद बिन सलमान और मुहम्मद बिन ज़ाएद ने मक्का बैठक और इसी प्रकार रमज़ान के अंत में फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद की बैठक के अवसर पर किसी भी तरह की कोई मुलाक़ात नहीं की और न ही उनके बीच टेलीफ़ोनी संपर्क का कोई समाचार मिला, यहां तक कि सऊदी मीडिया ने यमन से इमाराती सैनिकों की वापसी पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की।

ईरान और अमरीका के बीच तनाव और दुश्मनी बढ़ने के बाद ईरान के शहादत के दीवाने नेताओं ने खुले शब्दों में कह दिया है कि वह अमरीकी दबाव में नहीं आएंगे और न ही अपनी जनता को भूखे मरने देंगे, वह प्रतिरोध करेंगे, कुवैत को छोड़कर फ़ार्स की खाड़ी की हर अरब सरकारें युद्ध का मज़ा चखेंगी।


ईरान के वरिष्ठ नेता के एक सैन्य सलाहकार हुसैन दहक़ान ने खुली धमकी दी है कि ईरान क्षेत्र में अमरीका की हर छावनी पर बमबारी करेगा और ईरान के मित्र और घटक, बैलेस्टिक मीज़ाइलों से अमरीका के सारे घटकों के हित तबाह कर देंगे।  यह फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों के लिए खुला संदेश था और संयुक्त अरब इमारात ने जल्द ही इस संदेश को समझ लिया और ईरान के साथ संघर्ष विराम और वार्ता शुरु कर दी।

अंत में मैं यह कहना चाहता हूं कि संयुक्त अरब इमारत को इस्राईल के साथ संबंधों में बहाली के विषय पर भी पुर्नविचार करना चहिए क्योंकि संयुक्त अरब इमारात के इस्राईल के साथ बहुत अच्छे और ज़बरदस्त संबंध हैं, यूएई के अधिकारी इस्राईल को अपना दोस्त और हमदर्द समझते हैं, यह बहुत बड़ी ग़लती है, इस चीज़ ने एक मुस्लिम और अरब देश के रूप में संयुक्त अरब इमारात की छवि को ख़राब किया है।

हम यूएई के अधिकारियों से यह कहना चाहते हैं कि ईरानियों और इस्राईलियों का मिश्रण, तेल और पानी के मिश्रण जैसा है। यह अतिश्योक्तिव नहीं होगी अगर हम यह कहें कि इस्राईली पानी ज़हरीला और घातक है विशेषकर इसीलिए कि उसने अरब से दोस्ती के लिए ईरानोफ़ोबिया का साहारा लिया है।