रक्षा मामलों में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के सलाहकार ने हुर्मुज़ स्ट्रेटे में उपस्थिति और युद्ध आरंभ करने के बारे में अमेरिका को चेतावनी दी और कहा कि यमन में युद्ध समाप्त होने के बारे में सऊदी अरब और इमारात का बयान उनके पराजित होने का चिन्ह है।
उन्होंने अलजज़ीरा के साथ वार्ता में लंदन के बयान की प्रतिक्रिया में कहा कि हुर्मुज़ स्ट्रेट की स्थिति में हर प्रकार के परिवर्तन से टकराव की संभावना बढ़ जाती है।
ज्ञात रहे कि लंदन ने यूरोपीय देशों को एक नौसेना गठित करने का सुझाव दिया था जिसकी ज़िम्मेदारी फार्स की खाड़ी में यूरोपीय देशों के जहाज़ों की सुरक्षा व समर्थन करना था।
हुसैन देहकान ने कहा कि लंदन को ऐसे परिणामों का सामना करना पड़ सकता है जिसकी भविष्यवाणी नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि हुर्मुज़ स्ट्रेट में ईरान की नीति व समीकरण यह है कि सबको सुरक्षा प्राप्त हो और उनके तेल का निर्यात हो या किसी के भी तेल का निर्यात न हो।
ईरान के पूर्व प्रतिरक्षामंत्री ब्रिगेडियर जनरल हुसैन देहकान ने क्षेत्र में तनाव उत्पन्न करने वाली अमेरिका की नीति की ओर संकेत किया और कहा कि ईरान किसी भी स्थिति में ट्रंप से वार्ता नहीं करेगा और युद्ध की धमकी पाखंड है।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका युद्ध का फैसला करता है तो क्षेत्र में उसके समस्त ठिकानों और सैनिकों हितों को लक्ष्य बनाया जायेगा।
इसी प्रकार ब्रिगेडियर जनरल हुसैन देहकान ने सऊदी अरब और इमारात को भी चेतावनी दी और कहा कि अबूज़बी ईरान के राष्ट्रीय हितों पर हमला करने के अमेरिकी केन्द्र में परिवर्तित हो गया है और इमारात ने ऐसे व्यक्तियों को ईरान भेजा है जो शांति की बात करते हैं और इमारात के दृष्टिकोण में जो बदलाव आया है क्षेत्र में उनके प्रयासों की विफलता का सूचक है।
इसी प्रकार उन्होंने कहा कि ईरान किसी से भी अपनी मिसाइल क्षमता के बारे में वार्ता नहीं करेगा और कभी भी इस प्रकार की वार्ता नहीं होगी।