अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ने कहा है कि उनका देश हुर्मुज़ स्ट्रेट का रखवाला नहीं है। उन्होंने फार्स की खाड़ी से संबंधित परिवर्तनों और तनावों के संदर्भ में कहा कि यह न्याय नहीं है कि अमेरिका हुर्मुज़ स्ट्रेट में चीन, जापान और सऊदी अरब जैसे धनी देशों के जहाजों के रखवाले की भूमिका निभाये।
इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि तेल से समृद्ध फार्स की खाड़ी के देशों को चाहिये कि वे अपने तेल टैंकरों की सुरक्षा स्वयं करें। अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने हुर्मुज़ स्ट्रेट में कानून का उल्लंघन करने वाले ब्रितानी तेल टैंकर को रोके जाने पर इसी प्रकार की बात कही थी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप व्यापारी हैं और वह फार्स की खाड़ी की स्थिति को असुरक्षित करके सऊदी अरब, इमारात, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप से अधिक धन उगाही के प्रयास में हैं। इसी कारण ट्रंप ने बारमबार बल देकर कहा है कि फ्री में अमेरिका से लाभ उठाने का समय बीत गया है।
अमेरिका ने पिछले दो दशकों के दौरान पश्चिम एशिया के क्षेत्र में अपने वर्चस्व को सुरक्षित रखने के लिए सात ट्रिलियन डॉलर खर्च किया है और यह भारी पैसा उसने अमेरिकी नागरिकों से टैक्स लेकर पूरा किया था।
इसी प्रकार उसने यह पैसा दूसरे देशों व संगठनों व संस्थाओं से लिया था जबकि अगर वह सात ट्रिलियन का लगभग आधा पैसा अमेरिकी लोगों के कल्याण पर खर्च करता तो लोगों की स्थिति काफी बेहतर हो जाती। स्वतंत्र सिनेटर बर्नी सेन्डर्ज़ कहते हैं" अमेरिकी लोग युद्ध के इच्छुक नहीं हैं।"
अब ट्रंप जैसे बहुत से अमेरिकी अधिकारी साम्राज्यवादी व्यवस्था को चलाने के लिए जो खर्च होता है उसे खत्म करना चाहते हैं।
बहरहाल बहुत से टीकाकारों का मानना है कि ट्रंप ने जो यह कहा है कि उनका देश फार्स की खाड़ी में चीन, जापान और सऊदी अरब जैसे धनी देशों के तेल टैंकरों का रखवाला नहीं है तो उनका लक्ष्य कुछ देशों से अधिक पैसा एंठने के लिए उन पर दबाव डालना है।