22 जुलाई 2019 - 13:55

अरबी समाचारपत्र रायुल यौम में एक लेख छपा है जिसका शीर्षक है, "ईरान के तेल टैंकर को रोकने का ईरानी जवाब"

इस लेख में कहा गया हैः  जब ईरान ने यह एलान किया कि उसने ब्रिटेन के एक तेल टैंकर को फ़ार्स की खाड़ी में रोक लिया है तो इसपर ब्रिटेन को बहुत ग़ुस्सा आया।  ग़ुस्से के वक़्त ब्रिटेन यह भूल गया कि उसने भी जिब्राल्टर स्ट्रेट में ईरान के एक तेल टैंकर को ज़बरदस्ती रोक लिया था।  यह बातें उस समय सामने आईं जब हुरमुज़ स्ट्रेट में ईरान को उकसाने के लिए गतिविधियां आरंभ की गईं। ईरान की कार्यवाही, जवाबी कार्यवाही जैसी थी।  इस प्रकार की कार्यवाही, इस्लामी जगत की ओर से कम ही देखने को मिलती है। ब्रिटेन के तेल टैंकर को रोकने के बाद यह साफ़ हो गया कि ईरान उतना आसान निशाना नहीं है जिस प्रकार से जाॅन बोल्टन और नेतनयाहू सोचते हैं।


पत्र लिखता है कि तेहरान, अमरीका, ब्रिटेन तथा फ़्रांस जैसे शक्तिशाली देशों के साथ उन्ही के जैसा व्यवहार करता है। इससे पता चलता है कि ईरान उनकी टक्कर का है।  यही वह व्यवहार है जिसे हम चाहते हैं और पसंद करते हैं।  हम चाहते हैं कि पश्चिम को मालूम हो कि क्षेत्र में इस्लामी शक्ति मौजूद है जिससे टकराना कोई हंसी-खेल नहीं है।  यही कारण है कि ईरान के इस प्रकार के व्यवहार के ही कारणअमरीकी राष्ट्रपति, तेहरान के साथ कूटनीतिक मार्ग अपनाने पर विवश हुए हैं।  ट्रम्प को यह ज्ञात हो चुका है कि उनकी धमकी भरी ज़बान का कोई असर नहीं निकला और ईरान इससे बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुआ बल्कि नतीजा उल्टा ही निकला। अब ईरान सीधे तौर से टकराने के लिए व्याकुल है।  वह परोक्ष तथा अपरोक्ष हर प्रकार के टकराव के लिए तैयार है।  अब तेहरान ने जैसे को तैसा वाली नीति अपना ली है।  यह ईरान नहीं है जिसने हुरमुज़ स्ट्रेट में संकट को जन्म दिया है बल्कि यह दूसरों का काम है। वह दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार कर रहा है जैसा वे उसके साथ करते हैं।  यही कारण है कि ईरान के उस काम की कोई निंदा नहीं कर रहा है जिसे अमरीका और ब्रिटेन, उकसावे की कार्यवाही बता रहे हैं।

ईरान की शक्ति पर आज हम गर्व करते हैं।  वह पूरी शक्ति के साथ वार्ता की मेज़ पर आता है।  वह सामने वाले पक्ष के सम्मान के साथ आरोप लगाने से बचते हुए और किसी भी प्रकार के प्रतिबंधों को लागू न करने की नीति अपनाते हुए अपनी बात रखता है।  पश्चिम अभी यह नहीं समझा है कि ईरान शक्तिशाली हो चुका है।  तेहरान किसी को भी अपना अपमान करने या फिर अपने अधिकारों के हनन की अनुमति नहीं देगा।  इस वास्तविकता को ईरान के उस बयान से समझा जा सकता है जिसमे उसने बहुत ही स्पष्ट रूप में अमरीका द्वारा ईरान के एक ड्रोन को मारे गिराने के दावे को रद्द कर दिया था।  उसने प्रमाणों से सिद्ध कर दिया कि ट्रम्प का यह दावा पूरी तरह से निराधार था।  ईरान तथा पश्चिम के बीच टकराव की यह स्थिति उस समय तक बाक़ी रहेगी जबतक इस बात पर समझौता नहीं हो जाता कि क्षेत्र में युद्ध किसी के भी हित में नहीं है और युद्ध की सोच को समाप्त होना चाहिए। हमको बड़ी गंभीरता से अन्तर्राष्ट्रीय जहाज़रानी के बारे में सोचना होगा क्योंकि हुरमुज़ स्ट्रेट से माल की आवाजाही पर विश्व पूरी तरह से निर्भर है।  हुरमुज़ स्ट्रेट, पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में है।  विश्व को यह बात माननी होगी कि हुरमुज़ स्ट्रेट का कोई विकल्प नहीं है।

आज ईरान ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह क्षेत्र की ऐसी शक्ति है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।  इस बात को शत्रु समझ चुका है।  यही कारण है कि वह हर प्रकार के टकराव से बच रहा है।  उसको पता है कि यदि उसने क्षेत्र में कोई भी ग़लती की तो फिर उसको बुरी तरह से पछताना पड़ेगा।  ऐसे में क्या यह संभव है कि क्षेत्र में कोई एसा गठबंधन बने जो मालवाहक जहाज़ों का सुरक्षक बने जबकि ईरान का पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण है। वर्तमान परिस्थितियों में ईरान, क्षेत्र में किसी को भी हवाई या समुद्री क्षेत्र के हनन की अनुमति नहीं देगा।

(साभारः रायुल यौम)