आईआरजीसी ने फ़ार्स की खाड़ी में एसे जहाज़ को पकड़ लिया जो हज़ारों टन ईंधन, अवैध रूप से ले जा रहा था।
ईरान की इस्लामी क्रांति के सुरक्षाबलों, आईआरजीसी की नौसेना ने गुरूवार को इस बात के सुनिश्चित हो जाने के बाद कि फ़ार्स की खाड़ी में लार्क द्वीप के दक्षिण में अवैध रूप में ईंधन ले जाया जा रहा है, एक समुद्री जहाज़ को पकड़ लिया। इस तेल टैंकर से दस लाख लीटर से अधिक ईंधन की तस्करी की जा रही थी। सिपाहे पासदारान के अनुसार न्यायिक अधिकारियों से आदेश मिलने के बाद लार्क द्वीप के दक्षिण में इस तेल टैंकर को पकड़ा गया। आईआरजीसी की नौसेना के जनसंपर्क विभाग ने एक बयान में कहा कि फ़ार्स की खाड़ी और हुर्मुज़ स्ट्रेट में व्यवस्थित तस्करी का पता लगाने के उद्देश्य से आने-जाने वाली नौकाओं और जहाज़ों पर नज़र रखने के उद्देश्य से सेना, निरंतर गश्त करती रहती है। इसी बीच एक विदेशी जहाज़ पर तस्करी के ईंधन के लदे होने की पुष्ट जानकारी के बाद इस जहाज़ को लार्क द्वीप में रोक लिया गया।
फ़ार्स की खाड़ी और हुरमुज़ जलडमरू मध्य में आईआरजीसी का मुख्य कार्य, ईरान के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करना, शांति की स्थापना और समुद्रीय तस्करी से संघर्ष करना है। विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ के अनुसार ईरान की सेना फ़ार्स की खाड़ी में तेल की तस्करी को रोकने के उद्देश्य से तस्करी का ईंधन ले जाने वाले संदिग्ध जहाज़ों को रोकती है। संसार की समुद्री अर्थव्यवस्था में फ़ार्स की खाड़ी और हुरमुज़ स्ट्रेट की महत्वपूर्ण भूमिका है। एसे में इस क्षेत्र के संबन्ध में देश की सेना की ज़िम्मेदारी उल्लेखनीय हो जाती है। इस बारे में आईआरजीसी कमांडर हुसैन सलामी कहते हैं कि फ़ार्स की खाड़ी, हुरमुज़ स्ट्रेट तथा इसके निकटवर्ती द्वीप न केवल ईरान के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं बल्कि यह क्षेत्र के लिए भी विशेष महत्व के स्वामी हैं और यह संवेदनशील क्षेत्र, विश्व की अर्थव्यवस्था से पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र में आईआरजीसी के बलों द्वारा तस्करी का ईंधन ले जाने वाले एक जहाज़ का रोका जाना, ईरान की ज़िम्मेदारी का सूचक है जो इस क्षेत्र में पूरी मुसतैदी के साथ हर गतिविधि पर पैनी नज़र रखे हुए है। ईंधन की तस्करी, जहां एक ओर ईरान के राष्ट्रीय हितों के लिए हानिकारक है वहीं पर यह एक अन्तर्राष्ट्रीय अभिशाप भी है। आईआरजीसी के बलों द्वारा तस्करी का ईंधन ले जाने वाले जहाज़ के रोके जाने को, जो पूर्ण रूप से वैध और क़ानूनी है, इसकी आलोचना पर अमरीकी प्रतिक्रिया, पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। अमरीका की यह प्रतिक्रिया सिद्ध करती है कि वाशिग्टन, फ़ार्स की खाड़ी में ईंधन की तस्करी का समर्थक है।