17 जुलाई 2019 - 15:24
हम क्यों कह रहे हैं कि ईरान के सुप्रीम लीडर की धमकी को पूरी गंभीरता से लिया जाए? क्या तेल टैंकर के बदले तेल टैंकर और विमान के बद

अरब जगत के विख्यात टीकाकार अब्दुल बारी अतवान की टिप्पणी

अभी तो इसे जल्दबाज़ी ही कहा जाएगा कि दो दिन पहले हुरमुज़ स्ट्रेट से गुज़रते समय इमारात के तेल टैंकर के ग़ायब हो जाने की घटना को ईरान की इस्लामी क्रान्ति की सुप्रीम लीडर सैयद अली ख़ामेनई की धमकी से जोड़ा जाए जिसमें उन्होंने कहा कि जिबराल्टर स्ट्रेट में दुष्ट ब्रिटेन के हाथों ईरान का तेल टैंकर पकड़े जाने का भरपूर जवाब उचित समय और स्थान पर दिया जाएगा। सुप्रीम लीडर का कहना था कि ईरान का तेल टैंकर समुद्री डकैती का निशाना बना है और इस डकैती को क़ानूनी रूप देने की कोशिश की जा रही है, इस हाईजैकिंग का जवाब ज़रूर दिया जाएगा।

संयुक्त अरब इमारात की सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि उनका देश का उस तेल टैंकर से कोई लेना देना नहीं है जिसका नाम एमटी रियाह है और जिस पर पनामा का ध्वज है। प्रवक्ता ने बयान में कहा कि यह तेल टैंकर इमारात का नहीं है और न ही इमारात ने इसे किराए पर हासिल किया है, इस तेल टैंकर पर इमाराती स्टाफ़ नहीं है और इमारात ने इस मामले में किसी से कोई मदद भी नहीं मांगी है।

शायद यह बता देना उचित होगा कि जिस तेल टैंकर को ब्रिटिश नौसेना ने जिबराल्टर स्ट्रेट में पकड़ा है और जिस पर तीन लाख टन ईरानी तेल लदा हुआ था उस पर भी पनामा का ध्वज था और उस पर ईरानी स्टाफ़ भी नहीं था। उसका कप्तान भारतीय था और कर्मी दल के अन्य सदस्य भी कुछ एशियाई देशों के नागरिक थे।

हमें तो लगता है कि ग़ायब हो जाने वाले तेल टैंकर का संबंध या तो इमारात से है या ब्रिटेन से है या फिर दोनों से है।

ईरान के सुप्रीम लीडर कभी ही कोई बात ग़लत नहीं कहते। उनकी सरकार ने साबित कर दिया है कि यदि उसकी ओर से कोई धमकी दी जाती है तो उस पर अमल भी ज़रूर किया जाता है। ईरान ने अमरीका का जासूसी विमान मार गिराया, उसने यूरेनियम का संवर्धन का स्तर भी बढ़ा दिया।

ईरान का तेल टैंकर रोक कर ब्रिटेन ने बहुत बड़ी मूर्खता कर दी है। उसकी इस हरकत का समर्थन किसी भी यूरोपीय देश ने नहीं किया है।

वैसे टेरेज़ा मे का स्थान लेने के लिए दो  नेता जेरेमी हंट और बूरिस जान्सन के बीच मुक़ाबला है और दोनों ने कहा है कि वह अपने देश को अमरीका के इशारे पर ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी युद्ध में शामिल नहीं होने देंगे। यह एलान शायद ट्रम्प की मूर्खताओं से पैदा होने वाली मुसीबत से ब्रिटेन को दूर रखने की कोशिश है।

हम तो यही नसीहत करेंगे कि ईरान के सुप्रीम लीडर की धमकी को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए।