उन्होंने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि ईरान ने जेसीपीओए की प्रतिबद्धताओं से ज़्यादा काम किया है, बल दियाः आप योरोपियों ने एक भी वादे को पूरा नहीं किया तो किस बात पर हमसे इस बात की अपेक्षा रखते हैं कि हम अपने वादे पर अमल करें। जान लीजिए कि हमने अभी अपनी प्रतिबद्धताओं को कम करना शुरु किया है। इस बात में शक नहीं कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
अमरीका को परमाणु समझौते से निकले हुए एक साल से ज़्यादा का समय हो रहा है। इस दौरान योरोपियों ने परमाणु समझौते के बाक़ी रहने और इस बहुपक्षीय समझौते का पूरी तरह समर्थन करने का वादा किया था लेकिन आज कह रहे हैं कि जेसीपीओए के लागू न होने से ईरान को हुए नुक़सान की भरपाई नहीं कर सकते। योरोपीय पक्ष जेसीपीओए के संबंध में अपनी न्यून्तम कार्यवाही के साथ ईरान से अत्यधिक कार्यवाही की अपेक्षा कर रहे हैं।
जो बात स्पष्ट है वह यह कि किसी समझौते में सिर्फ़ एक पक्ष से वचन के पालन की अपेक्षा नहीं की जाती।
जैसा कि इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने ईरान के संबंध में योरोपियों सहित पश्चिम के दुस्साहसपूर्ण व्यवहार की जड़ उनका घमन्ड बताते हुए कहा कि ख़ुद को बड़ा समझने की वजह से योरोप सच्चाई को समझ नहीं पा रहा है, अलबत्ता कमज़ोर राष्ट्रों व देशों के ख़िलाफ़ इस घमन्ड से उन्हें फ़ायदा पहुंचता है लेकिन उन राष्ट्रों के सामने जो निडर और अपने अधिकार की रक्षा करते हैं, पश्चिम को हार होती है।