16 जुलाई 2019 - 15:29
तुम किस मुंह से हमसे वचनों पर अमल की मांग कर रहे हो, पश्चिम को वरिष्ठ नेता की फटकार

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने परमाणु समझौते के बारे में यूरोपीय देशों के उल्लंघनों और ज़ोरज़बरदस्ती की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ईरान ने अपने वचनों पर अमल के स्तर में कमी का क्रम शुरु कर दिया है जो भविष्य में भी जारी रहेगा।

ईरान में पहली नमाज़े जुमे के आयोजन की वर्षगांठ के अवसर पर दुनिया हर के इमामे जुमा और इमामे जमात ने इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में वरिष्ठ नेता से मुलाक़ात की।

इस अवसर पर अपने संबोधन में वरिष्ठ नेता ने जिब्राल्टर स्ट्रेट में ईरानी आयल टैंकर को रोके जाने को समुद्री डकैती क़रार  दिया और कहा कि ब्रिटेन की यह कार्यवाही, क़ानून का खुला उल्लंघन और आपराधिक कार्यवाही है।

वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान और इस व्यवस्था के मोमिन लोग, ब्रिटेन की इस दुष्टता का जवाब ज़रूर देंगे।

वरिष्ठ नेता ने स्वयं को बड़ा समझने को पश्चिमी देशों की सबसे बड़ी समस्या क़रार देते हुए कहा कि इस घमंड की वजह से वह सत्यता को समझने से वंचित रहते हैं।

उनका कहना था कि यदि यूरोप के मुक़ाबले में कोई कमज़ोर सरकार हो तो उनका घमंड काम कर जाता है किन्तु यदि कोई ऐसा देश हो जो इनकी वास्तविकता को पहचानकर उनके सामने डट जाए तो पश्चिम ढेर हो जाता है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने परमाणु समझौते के हवाले से यूरोपीय देशों के उल्लंघनों की ओर संकेत करते हुए कहा कि परमाणु समझौते को बाक़ी रखने के लिए यूरोप ने ईरान से 11 वचन किए थे किन्तु इनमें से एक पर भी अमल नहीं किया गया जबकि ईरान ने परमाणु समझौते पर अपने वचनों से अधिक बढ़कर अमल किया है।

उन्होंने ईरान की ओर से परमाणु समझौते पर अमल के स्तर में कमी के बारे में यूरोप की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि तुमने अपने एक भी वचन पर अमल नहीं किया और हम से मांग कर रहे हो कि हम अपने वचनों पर अमल करते रहें।

वरिष्ठ नेता ने यूरोपीय देशों को संबोधित करते हुए कहा कि तुम ने अपने एक भी वादे पर अमल नहीं किया तो किस मुंह से हम से मांग कर रहे हो कि हम अपने वचनों पर अमल करते रहें, हमने भी वापसी की प्रक्रिया शुरु कर दी है और निश्चित रूप से यह प्रक्रिया भविष्य में भी जारी रहेगी।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने देश की गौरवपूर्ण रक्षाशक्ति और क्षमताओं को पवित्र प्रतिरक्षा के काल के दबाव, प्रतिबंधों और विदेशी शक्तियों से आशाएं तोड़ लेने का परिणाम क़रार दिया।

उन्होंने कहा कि अपनी भुजाओं पर भरोसा करते हुए वर्तमान स्थिति का भी विभिन्न मैदानों विशेषकर आर्थिक लेहाज़ से अच्छा परिणाम निकलेगा।