जनरल असदी ने कहा कि सीरिया युद्ध के आरंभ में हथियारबंद विरोधी, राष्ट्रपति बश्शार असद के महल के चार सौ मीटर तक पहुंच गये थे और महल पर मार्टर गोले दाग रहे थे लेकिन सीरियाई जनता, वहां की सेना और ईरानी सलाहकारों ने जनरल सुलैमानी के नेतृत्व में सीरिया को बचा लिया।
ईरानी सेना के उच्चाधिकारी जनरल असदी ने कहा कि आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल सुलैमानी ने पुतीन को यह समझाने में सफल रहे कि सीरिया, पूरब का अंतिम मोर्चा है और अगर उसे भी खो दिया तो पश्चिम आप को बिल्कुल महत्व नहीं देगा।
उन्होंने बताया कि सीरिया युद्ध के आरंभ होने के चार साल बाद, जनरल सुलैमानी ने रूस की यात्रा की और इस यात्रा के दौरान उन्होंने रूस के राष्ट्रपति विलादमीर पुतीन के साथ दो घंटे बीस मिनट की भेंट की ताकि रूस को सीरिया में लाया जा सके। किसी भी देश के राष्ट्रपति से किसी भी अधिकारी की चाहे वह जिस पद पर हो, कूटनीतिक सिद्धांत के अनुसार एक निर्धारित अवधि तक ही भेंट हो सकती है इस लिए जब हमने सुना कि जनरल सुलैमानी और पुतीन में लगभग ढाई घंटे तक भेंट हुई तो हमें बहुत आश्चर्य हुआ।
जनरल असदी ने कहा कि हर हाल में रूस एक बड़ी ताक़त है और जब वह किसी मोर्चे पर जाता है कि वहां की विजय में निश्चित रूप से उसका भी अधिकार होता है लेकिन कुछ गलियारे इस्लामी गणतंत्र ईरान की महानता व ताक़त को कम दर्शाने के लिए सीरियाई मोर्चे पर असाधारण विजय के बारे में एसी बातें करते हैं जिससे यह सिद्ध हो कि यह ईरान की विजय नहीं है।
याद रहे सीरिया संकट में हस्तक्षेप के लिए ईरान ने रूस को तैयार किया था जिसके बाद से इस देश में हालात तेज़ी से सीरिया, ईरान व रूस के हित में बदलते गये।
अमरीका की भूतपूर्व विदेशमंत्री कोन्डोलीज़ा राइस ने एक बार कहा था कि जहां जनरल सुलैमानी पहुंच जाते हैं वहां हमारी सारी योजनाएं विफल हो जाती हैं।