14 जुलाई 2019 - 13:21
एफ़बीआई की चेतावनी, सऊदी सरकार अमेरिका में मौजूद अपने विरोधियों की करवा सकती है हत्या

अमेरिकी संघीय पुलिस "एफ़बीआई" ने सऊदी अरब के आले सऊद शासन के विरोधियों और इस देश के वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी से संबंध रखने वाले लोगों को चेतावनी जारी की है कि वे होशियार रहें क्योंकि रियाज़ सरकार उनकी हत्या करवा सकती है।

समाचार एजेंसी मीडिल इस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक़, एफ़बीआई ने अमेरिका में रहने वाले चार सऊदी नागरिकों सहित एक अन्य अरब नागरिक को चेतावनी दी है कि उनकी जान ख़तरे में है। एफ़बीआई ने अपनी चेतावनी में कहा है कि उसके पास ऐसी रिपोर्ट है कि अमेरिका में रहने वाले चार आले सऊद शासन विरोधी नागरिक और एक अन्य अरब पत्रकार जिसका संबंध सऊदी अरब के मारे जा चुके वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी से है उनकी जान को सऊदी अरब के एजेंटों से ख़तरा है।

समाचार एजेंसी मीडिल इस्ट आई के अनुसार अमेरिकी सूत्र का कहना है कि एफ़बीआई और अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए सऊदी अरब के वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी की तुर्की स्थित सऊदी अरब के दूतावास में हुई निर्मम हत्या के बाद, जमाल ख़ाशुक़्जी की क़रीबी लोग जो अमेरिका, कनाडा और नार्वे में रह रहे हैं उनसे संपर्क में है। अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि उसे इस बात का डर है कि सऊदी अरब की सरकार इन सभी लोगों की हत्या की साज़िश रच सकती है।

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब के आले सऊद शासन के शासक न केवल विदेशों में रहने वाले अपने विरोधियों की खुले आम हत्याएं करवा रहे हैं बल्कि स्वयं सऊदी अरब में रहने वाले ऐसे सभी धर्मगुरुओं, राजनीतिक हस्तियों और आम लोगों को मौत घाट उतार रहे हैं जो रियाज़ सरकार की ग़लत और अधर्मी नीतियों की आलोचना करते हैं। इन हत्याओं में सबसे अधिक संख्या इस देश के अल्पसंख्यक शिया मुसलमानों की है। याद रहे कि सऊदी अरब के वरिष्ठ शिया धर्मगुरु और आले सऊद सरकार की अत्याचारी एवं दमनकारी नीतियों के विरोधी आयतुल्लाह शेख़ बाक़िर निम्र को 2 जनवरी वर्ष 2016 में आले सऊद ने हत्या करवा दी थी।

इसी तरह मानवाधिकार मामलों में सऊदी सरकार की निंदा करने और यमन युद्ध में रियाज़ को युद्ध अपराधी बताने वाले सऊदी अरब के वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी को 2 अक्टूबर वर्ष 2018 में तुर्की स्थित सऊदी अरब के दूतावास में बड़ी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था। सऊदी अरब के दोस्त माने जाने वाले अमेरिका ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया था कि ख़ाशुक़्जी की हत्या सऊदी युवारज मोहम्मद बिन सलमान के आदेश से हुई है। इन सबके बावजूद अमेरिका सहित दुनिया भर के तथाकथित मानवाधिकार का राग आलापने वाले देश न मोहम्मद बिन सलमान से प्रश्न पूछ रहे हैं और न ही सऊदी अरब की सरकार की निंदा कर रहे हैं।